विंध्याचल के काली खोह में मां पर्वतवासिनी काली मन्दिर (काली गुफा) शक्ति और शांति का अद्भुत संगम, जहां भक्तों की हर मनोकामना होती है पूरी!
मिर्जापुर के विंध्य की पावन पहाड़ियों में स्थित काली खोह में मां पर्वतवासिनी काली मन्दिर (काली गुफा) आस्था और भक्ति का एक ऐसा दिव्य केंद्र है, जहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु मां काली के दर्शन करने व आशीर्वाद लेने पहुंचते हैं। मान्यता है कि मां पर्वतवासिनी काली मन्दिर अपने दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
काली खोह स्थित प्राचीन काली मन्दिर (काली गुफा) अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं, और आध्यात्मिक वातावरण के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां मां काली प्राकृतिक गुफा में विराजमान हैं और अपने दिव्य स्वरूप में भक्तों को दर्शन देती हैं। मंदिर का शांत वातावरण और गुफा की आध्यात्मिक अनुभूति श्रद्धालुओं को एक अलग ही सुकून प्रदान करती है।
मंदिर परिसर की स्वच्छता और यहां की सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं श्रद्धालुओं को आकर्षित करती हैं। यहां आने वाले भक्त बिना किसी शुल्क के मां के दर्शन कर सकते हैं। शांत वातावरण में श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर में किसी प्रकार के शोर-शराबे के बजाय भक्ति और आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है।
मंदिर के सेवक मयंक मिश्रा बताते हैं कि मां के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त निराश होकर नहीं लौटता, ऐसी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मंदिर की दिव्य गुफा में चुनरी बांधकर अपनी मनोकामना मांगने की परंपरा भी प्रचलित है। भक्त विश्वास के साथ मां के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं और सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विंध्याचल धाम में मां विंध्यवासिनी, मां काली और मां अष्टभुजा के दर्शन का विशेष महत्व है। इन तीनों शक्तिपीठों को मिलाकर बनने वाला त्रिकोण विंध्य क्षेत्र की आध्यात्मिक पहचान माना जाता है। मां काली मन्दिर (काली गुफा) का प्राचीन मंदिर इसी पावन धार्मिक परंपरा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
मान्यता है कि मां काली का स्वरूप शक्ति, साहस और बुराइयों पर विजय का प्रतीक है। काली गुफा मंदिर में मां की दिव्य प्रतिमा के दर्शन कर श्रद्धालु अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मक ऊर्जा की कामना करते हैं। गुफा के भीतर का वातावरण और मां के प्रति भक्तों की अटूट श्रद्धा इस स्थान को विशिष्ट आध्यात्मिक पहचान प्रदान करती है।
विंध्य पर्वत और पतित पावनी मां गंगा के पावन क्षेत्र में स्थित यह धाम केवल पूजा-अर्चना का स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था, साधना और आत्मिक शांति का भी केंद्र है। यहां पहुंचकर श्रद्धालु अपनी व्यस्त दिनचर्या से दूर कुछ पल मां के चरणों में बिताते हैं और मन की शांति का अनुभव करते हैं।
अगर आप भी मां विंध्यवासिनी के दर्शन के लिए विंध्याचल आ रहे हैं, तो मां काली गुफा के इस प्राचीन और पावन मंदिर में दर्शन करना न भूलें। मां के दरबार में शीश झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त करें और विंध्य धाम की इस अद्भुत आध्यात्मिक विरासत का अनुभव करें।
............... मझवां गांव में आधी रात चोरी, फल दुकानदार के घर से लाखों के गहने और नकदी से भरा बक्सा उड़ा, गांव में दहशत कछवां / मिर्जापुर। कछवां थाना क्षेत्र के मझवां गांव में 12 अक्टूबर की देर रात करीब 12 से 1 बजे के बीच चोरी की बड़ी वारदात हुई। चोर फल दुकानदार मुन्ना सोनकर के घर से नकदी और गहनों से भरा बक्सा उठा ले गए। आहट से खुली बेटी की नींद, मां ने देखा बाइक से भागते चोर परिवार के मुताबिक घर के बाहर वाले कमरे में मुन्ना सोनकर की बेटी चंचल सोनकर और उसका भाई सो रहे थे। बक्से के ऊपर रखा सामान हटाने और बक्सा उठाने की आहट से चंचल की नींद खुल गई। उसने तुरंत अपनी मां शीला सोनकर को जगाया और शोर मचाया। शीला सोनकर ने बाहर निकलकर देखा तो चोर बक्सा लेकर अपाचे जैसी मोटरसाइकिल से भाग रहे थे। शोर सुनकर आसपास के लोग भी जाग गए, लेकिन तब तक चोर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। बक्से में थे 6 लाख के गहने-नकदी पीड़ित मुन्ना सोनकर ने बताया कि बक्से में दो दिन की फल की दुकानदारी की नकदी और घर की बचत के गहने रखे थे। परिवार के अनुसार बक्से में करीब डेढ़ से दो लाख रुपए नकद और लगभग चार लाख रुपए के गहने थे। गहनों में पायल, करधनी, मंगलसूत्र और सोने की चेन शामिल बताई जा रही है। चोरों ने बड़ी ही चालाकी से वारदात को अंजाम दिया। 20 मीटर दूर मिले चोरों के जूते, 112 पर दी सूचना घटना के बाद मुन्ना सोनकर ने तत्काल डायल 112 पर सूचना दी। मौके पर पहुंची कछवां पुलिस ने जांच-पड़ताल शुरू की। मंगलवार सुबह तलाशी के दौरान घर से करीब 20 मीटर दूर घास में चोरों के दोनों जूते पड़े मिले। परिजनों ने बताया कि चोरों ने घर से कुछ दूरी पर ही अपने जूते उतार दिए थे ताकि आहट न हो और चुपचाप अंदर घुस गए। गांव में दहशत का माहौल चोरी की वारदात के बाद मझवां गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों ने पुलिस से रात्रि गश्त बढ़ाने और जल्द चोरों का खुलासा करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच में जुटी है। अब सभी की निगाह पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है।
.................... बाजार में कलशयात्रा के पश्चात श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ ड्रमंडगंज प्राचीनतम बाजार स्थित प्रसिद्ध मां दुर्गा मंदिर परिसर में सेवटी नदी के किनारे भव्य व दिव्य पंडाल में शारदीय नवरात्र के प्रथम दिवस पर रविवार कोमां दुर्गा का प्राण प्रतिष्ठा आचार्य पंडित रमाकांत पाण्डेय ने करवाया।द्वितीय दिवस सोमवार शाम को कलशयात्रा ड्रमंडगंज बाजार में निकाली गयी उसके पश्चात सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का महोत्सव का विधिवत शुभारम्भ भी हो गया।श्रीमद्भागवत कथा की पूर्णाहुति रविवार 18-10-26 को होगी।सोमवार रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।नवयुवक बाल समिति केअध्यक्ष शिवम् कुमार केशरी,संचालक पिन्टू केशरी,प्रभारी शशांक केशरी ने क्षेत्रीय जनता से अपील की है कि शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा-आराधना के साथ श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कर पुण्य के भागी बनें।
..................... पेंशनरों के लिए जीवन प्रमाण पत्र जमा करने हेतु डिजिटल व्यवस्था लागू, मोबाइल ऐप एवं जन सुविधा केन्द्र के माध्यम से कर सकेंगे ऑनलाइन प्रमाणीकरण - मुख्य कोषाधिकारी मीरजापुर मुख्य कोषाधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया है कि शासनादेश दिनांक 13 मई 2015 के माध्यम से उत्तर प्रदेश सरकार के समस्त पेंशनरों को अपना डिजिटल जीवित प्रमाण पत्र आन लाइन करने के लिए आधिकारिक वेबवाइट https://jeevan pramaan.gov.in की व्यवस्था की गयी है। उपरोक्त के क्रम में कोषागार मीरजापुर के समस्त सम्मानित पेंशनरों को सूचित किया जाता है, कि वे अपना डिजिटल जीवित प्रमाण पत्र आनलाइन स्वयं अपने मोबाइल के गुगल प्लेस्टोर से आधार फेस आर.डी. एवं जीवन प्रमाण ऐप को डाउनलोड कर आधार से अधिकृत कर प्रमाण पत्र अपलोड किया जा सकता है, साथ ही अपने किसी नजदीकी जन सुविधा केन्द्र / डाकघर आदि के माध्यम से डिजिटल जीवित प्रमाण पत्र कोषागार मीरजापुर को प्रेषित किया जा सकता है। इसके बावजूद यदि किसी प्रकार की कोई समस्या आती है तो कोषागार में उपलब्ध पेंशनर हेल्प डेस्क से मदद ली जा सकती है।
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