मिर्जापुर में अवैध विद्यालयों पर कार्रवाई ठप ! शासन के आदेश के बावजूद BSA-ABSA/DIOS की चुप्पी,
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा ‘शिक्षा माफिया’?
मिर्जापुर/लखनऊ ब्यूरो | The Reports Podcast (TRP News)
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बाद भी मिर्जापुर जिले में अवैध रूप से संचालित हो रहे विद्यालयों पर अपेक्षित कार्रवाई न होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने के लिए बार-बार निर्देश दिए हैं कि बिना मान्यता के चल रहे विद्यालयों को तत्काल प्रभाव से बंद कर सील किया जाए। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आ रही है।
मिर्जापुर जिले के 12 विकासखंडों
में बड़ी संख्या में ऐसे विद्यालय संचालित हो रहे हैं जो या तो बिना किसी मान्यता के चल रहे हैं, या फिर प्राथमिक स्तर की मान्यता लेकर हाई स्कूल और इंटरमीडिएट तक की कक्षाएं चला रहे हैं। यह न केवल नियमों का खुला उल्लंघन है बल्कि हजारों बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
हर ब्लॉक में 30-40 अवैध विद्यालय, फिर भी कार्रवाई क्यों नहीं?
सूत्रों के अनुसार मिर्जापुर के प्रत्येक विकासखंड में लगभग 30 से 40 अवैध विद्यालय संचालित हो रहे हैं। यदि औसतन आंकड़ा निकाला जाए तो पूरे जिले में 350 से अधिक विद्यालय नियमों के विरुद्ध संचालित हो सकते हैं।
इन विद्यालयों की कुछ प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार हैं:
बिना किसी मान्यता के पूरी तरह अवैध विद्यालय
केवल कक्षा 5 तक की मान्यता लेकर हाई स्कूल तक संचालन
हाई स्कूल मान्यता लेकर इंटरमीडिएट तक पढ़ाई
फर्जी तरीके से CBSE बोर्ड का नाम उपयोग
“इंग्लिश मीडियम” या “पब्लिक स्कूल” के नाम पर धोखाधड़ी
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब इतनी बड़ी संख्या में अवैध विद्यालय खुलेआम संचालित हो रहे हैं, तो संबंधित अधिकारी— विशेषकर BSA (Basic Shiksha Adhikari) और ABSA (Assistant Basic Shiksha Adhikari) —अब तक क्या कर रहे हैं?
शासन का स्पष्ट आदेश: सील करो, लेकिन ज़मीन पर सन्नाटा
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा हाल ही में सख्त आदेश जारी किए गए हैं:
बिना मान्यता वाले विद्यालयों को तत्काल बंद किया जाए
संचालकों पर कानूनी कार्रवाई की जाए
बच्चों का नामांकन वैध विद्यालयों में कराया जाए
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
इसके बावजूद मिर्जापुर में अब तक कितने विद्यालयों पर कार्रवाई हुई—इसका स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आ पाया है। स्थानीय स्तर पर जानकारी लेने पर भी अधिकारी गोलमोल जवाब देते नजर आते हैं।
क्या है BSA और ABSA की भूमिका?
BSA और ABSA का कार्यक्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण होता है:
विद्यालयों की मान्यता की जांच
शिक्षा गुणवत्ता की निगरानी
अवैध संचालन पर कार्रवाई
अभिभावकों की शिकायतों का निस्तारण
लेकिन जब यही अधिकारी निष्क्रिय हो जाएं, तो पूरा सिस्टम चरमरा जाता है।
“प्रोत्साहन राशि” या “घूस”? बड़ा सवाल
स्थानीय लोगों और शिक्षा से जुड़े सूत्रों का आरोप है कि अवैध विद्यालयों पर कार्रवाई न होने के पीछे एक बड़ा कारण “प्रोत्साहन राशि” है।
यह “प्रोत्साहन राशि” वास्तव में क्या है?
विद्यालय संचालकों द्वारा अधिकारियों को मासिक भुगतान
निरीक्षण के दौरान अनदेखी के बदले लेन-देन
फर्जी रिपोर्ट तैयार करने के एवज में रिश्वत
अगर इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
बच्चों का भविष्य दांव पर
इन अवैध विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के सामने कई समस्याएं हैं:
बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं
फर्जी प्रमाणपत्र का खतरा
गुणवत्ताहीन शिक्षा
मान्यता प्राप्त विद्यालय में प्रवेश में दिक्कत
कई मामलों में देखा गया है कि जब बच्चों का एडमिट कार्ड नहीं बनता, तब अभिभावकों को भारी आर्थिक और मानसिक नुकसान उठाना पड़ता है।
अभिभावकों की मजबूरी या अज्ञानता?
ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक अक्सर
इन विद्यालयों के झांसे में आ जाते हैं:
कम फीस का लालच
अंग्रेजी माध्यम का दावा
नजदीकी सुविधा
भ्रामक विज्ञापन
अशिक्षित/डिग्री विहीन अध्यापक
Example_"12th Pass"
लेकिन असलियत सामने आने पर उन्हें पछताना पड़ता है।
CBSE के नाम पर बड़ा खेल
कई विद्यालय बिना किसी अनुमति के CBSE बोर्ड का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। यह एक गंभीर अपराध है।
ऐसे विद्यालय:
फर्जी वेबसाइट बनाते हैं
नकली प्रमाणपत्र देते हैं
बच्चों का भविष्य खतरे में डालते हैं
जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:
क्या BSA और ABSA की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या शासन स्तर पर जांच बैठाई जाएगी?
क्या दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई होगी?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि “भ्रष्टाचार किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
जनता की मांग: तत्काल कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों की प्रमुख मांगें:
जिले के सभी विद्यालयों की जांच
अवैध विद्यालयों को तुरंत सील किया जाए
दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाए
पारदर्शी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
The Reports Podcast की अपील
The Reports Podcast (TRP News) प्रशासन से यह मांग करता है कि:
मिर्जापुर के सभी 12 विकासखंडों की विशेष जांच कराई जाए
हर ब्लॉक में कार्रवाई का डेटा सार्वजनिक किया जाए
शिक्षा माफिया पर कड़ी कार्रवाई हो
निष्कर्ष: अब नहीं तो कब?
यदि अब भी कार्रवाई नहीं होती, तो यह स्पष्ट संकेत होगा कि कहीं न कहीं सिस्टम में बड़ी खामी है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।
शिक्षा किसी भी समाज की नींव होती है। अगर यही नींव कमजोर होगी, तो भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
दुर्लभ त्रिपाठी पत्रकार ✍️✍️✍️
......................... मीरजापुर में 84 और परिवारों को शादी के लिए मिलेंगे गैस सिलेंडर, अब तक 250 से ज्यादा शादियों में पहुंची मदद मीरजापुर, 21 अप्रैल 2026: शादी के सीजन में गैस सिलेंडर की समस्या से जूझ रहे परिवारों के लिए जिला प्रशासन फिर आगे आया है। डीएम पवन कुमार गंगवार के निर्देश पर एसडीएम सदर गुलाब चन्द्र ने 84 और परिवारों के लिए शादी समारोह में तत्काल गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया है। एसडीएम सदर गुलाब चंद जी ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत ऑयल कॉरपोरेशन और एचपी के विक्रय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित गैस एजेंसियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को तुरंत सिलेंडर मुहैया कराए जाएं। एजेंसियों ने आदेश मिलते ही वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। एसडीएम सदर के आदेश पर अब तक 250 से अधिक शादी समारोहों के लिए उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों के जरिए सिलेंडर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। प्रशासन का मकसद साफ है: गैस की कमी से किसी भी परिवार की खुशियों में खलल न पड़े। एसडीएम सदर गुलाब चन्द्र और डीएसओ मीरजापुर द्वारा एआरओ मुकेश कुमार तथा सप्लाई इंस्पेक्टर अनुराग मिश्र, विवेक सिंह, पुनीत आदि के माध्यम से शादी समारोहों के लिए गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है। टीम लगातार आवेदनकर्ताओं का सत्यापन कर तत्काल सिलेंडर पहुंचा रही है। जिला प्रशासन ने बताया कि शादी समारोह के लिए सिलेंडर की जरूरत वाले परिवार एसडीएम सदर कार्यालय या जिला पूर्ति कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। सत्यापन के बाद प्राथमिकता पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाएगा।
............................... मिर्जापुर: पत्रकार से मारपीट, गाली-गलौज और फर्जी मुकदमे की धमकी—SHO पर गंभीर आरोप, वैध कागजों के बावजूद बाइक सीज़ मिर्जापुर। जनपद के संत नगर थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि थाना अध्यक्ष (SHO) ने एक पत्रकार सुशील कुमार के साथ न केवल अभद्रता की, बल्कि थप्पड़ मारकर गाली-गलौज की और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी। पीड़ित पत्रकार सुशील कुमार के अनुसार, वह अपने निजी कार्य से बाजार जा रहे थे। इसी दौरान रास्ते में चल रही पुलिस चेकिंग के दौरान उनकी बाइक रोकी गई। जैसे ही उन्होंने वाहन साइड में लगाया, आरोप है कि SHO ने बिना किसी ठोस कारण के उन्हें थप्पड़ मार दिया और अपशब्द कहने लगे। पत्रकार का कहना है कि उन्होंने मौके पर अपने दस्तावेज और पहचान बताई, लेकिन इसके बावजूद थाना अध्यक्ष का रवैया आक्रामक बना रहा। आरोप है कि उन्हें धमकी दी गई—“तुम्हारे ऊपर मुकदमा लिखकर अंदर कर देंगे।” वैध कागजों के बावजूद बाइक सीज़ सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सुशील कुमार का दावा है कि उनकी टू-व्हीलर बाइक के सभी वैध कागजात मौजूद थे, फिर भी पुलिस द्वारा वाहन को जबरन सीज़ कर दिया गया। इससे पुलिस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
............................... मिर्ज़ापुर-मीना सिंह हत्याकांड में उसके ड्राइवर और उसके साथी को आजीवन कारावास।शहर कोतवाली क्षेत्र के राजा विजयपुर कोठी मोहल्ले में 10 वर्ष पहले कालोनाइजर मीना सिंह हत्याकांड मामले में चालक दिलीप पटेल और उसके साथी शन्नू खां को दोषी पाते हुए अपर सत्र न्यायाधीश शबीह जेहरा ने उम्र कैद की सजा सुनाई।साथ ही 60 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया।
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