उत्तर प्रदेश पुलिस मे सब-इंस्पेक्टर के 537 पदों के लिए निकली भर्ती।
योग्यता- Graduate
उम्र- 21 से 28 वर्ष
अंतिम तिथि- 19/01/2026
रोजगार समाचार को अपने आस पास को जरूरतमंद व्यक्तियों को जरूर भेजें।
........................... खौफनाक और खतरनाक होती जा रही है पत्रकारिता की राह उत्तर प्रदेश में मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि आज के दौर में पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जोखिम भरा संघर्ष बनती जा रही है। सच दिखाने और समाज को आईना दिखाने की कीमत अब पत्रकारों को अपनी सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्रता से चुकानी पड़ रही है। राजधानी लखनऊ में राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार सुशील अवस्थी ‘राजन’ पर हुए जानलेवा हमले का मामला आज भी कई सवाल खड़े करता है। उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक और भाजपा के प्रभावशाली नेता नीरज सिंह के दबाव के बावजूद न तो हमलावरों का खुलासा हो सका और न ही उनके सरगनाओं तक पुलिस पहुँच पाई। यह स्थिति कानून व्यवस्था और निष्पक्ष जांच पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। दूसरी ओर, सच्ची और जनहित से जुड़ी खबरें लिखने या दिखाने वाले पत्रकारों पर पुलिस की तत्परता देखते ही बनती है। हाल ही में राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त पत्रकार राजवीर सिंह के विरुद्ध थाना गाजीपुर में जिस तरह मुकदमा दर्ज किया गया, वह अत्यंत चिंताजनक है। यह घटना केवल एक पत्रकार का मामला नहीं, बल्कि पूरे मीडिया जगत के लिए चेतावनी है, जिस पर समस्त पत्रकारों को एकजुट होकर विरोध दर्ज कराना चाहिए। और भी हैरानी की बात यह है कि आवास विकास विभाग के एक ऐसे बाबू, जिन पर भ्रष्टाचार और निलंबन जैसे गंभीर आरोप रह चुके हैं, ने अपने खिलाफ प्रकाशित समाचारों से बौखलाकर पत्रकार पर संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। यह पुलिस द्वारा स्थापित नियमों और मानकों का खुला मखौल है। गौरतलब है कि पुलिस विभाग के पूर्व में जारी कार्यालय आदेशों के अनुसार किसी भी पत्रकार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने से पहले विधिवत जांच और सत्यापन आवश्यक है। इसके बावजूद, एक सम्मानित और मान्यता प्राप्त पत्रकार के खिलाफ रातों-रात मुकदमा दर्ज कर देना यह दर्शाता है कि नियम केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं। विडंबना यह भी है कि जब कोई पत्रकार स्वयं थाने में जाकर मुकदमा दर्ज कराना चाहता है, तो उसके मामले को मनगढ़ंत बताकर टाल दिया जाता है। लेकिन जब बात पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करने की आती है, तो वही पुलिस प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करती नजर आती है। ऐसे हालात में पत्रकार संगठनों की चुप्पी बेहद चिंताजनक है। अब समय आ गया है कि यह खामोशी टूटे, और पत्रकार अपने अधिकार, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए एकजुट होकर आवाज़ बुलंद करें। क्योंकि अगर आज पत्रकार सुरक्षित नहीं रहेगा, तो कल सच भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
............................. असहाय नगर पालिका कर्मी बताया जाता है कि चौबेटोला वार्ड में चिनिहवा इनारा के पास नाली जाम है आसपास के लोग पानी न निकलने से परेशान है। सफाई नायक ने कहा कि इस जगह पर बराबर जाम रहता है क्योंकि वहाँ जब भी पटिया हटाकर साफ सफाई करवाने का प्रयास करते है मकान मालिक लड़ने पर उतारू हो जाते है पटिया रखकर गाड़ी चढ़ाते है और वो भी नही छूने दे रहे है कहते है पानी न निकले तो हम क्या करे? अब इसका समाधान शायद पालिका अध्यक्ष ही निकाल सकते है क्योंकि एक दो बार वहां सफाई कर्मियों लड़ाई हो चुकी है
....................................... अलीगढ़ एएमयू कैंपस में शिक्षक की गोली मारकर हत्या, मचा हड़कंप मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी कैंटीन के पास बदमाशों ने की फायरिंग बुधवार की रात टहलने के बाद साथियों संग कैंटीन पहुंचे थे शिक्षक बाइक सवार दो हमलावर वारदात के बाद फरार फायरिंग से छात्रों में अफरा-तफरी, कैंपस में दहशत घायल शिक्षक को मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, डॉक्टरों ने मृत घोषित किया मृतक की पहचान राव दानिश के रूप में, एबीके यूनियन स्कूल में थे शिक्षक
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