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उगते सूरज को अर्घ्य देकर छठ मैइया के पर्व का हुआ समापन 

उगते सूरज को अर्घ्य देकर छठ मैइया के पर्व का हुआ समापन 


कछवां: मां विंध्यवासिनी व  बाबा विश्वनाथ के मध्य स्थित ऋषियों की तपो भूमि बरैनी स्थित जगतानंद आश्रम घाट व आदर्श नगर पंचायत स्थित कश्यप कुंड पर मंगलवार को सुबह 5 बजे डीजे ढोल ताशे के साथ-साथ हजारों की संख्या में व्रती महिलाएं पहुंचकर छठ मैईया पर्व पर पुरे विधि विधान से पूजा अर्चन कर उगते सूरज को अर्घ्य देकर समापन किया मालूम हो कि छठ पूजा देशभर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। 4 दिन का ये त्योहार छठी मईया और सूर्य देव को समर्पित होता है। ये 4 दिन व्रत रखने वाले के लिए तपस्या माने गए हैं। छठ पूजा सिर्फ धार्मिक तौर पर ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि सूर्य का इस पूजा से जुड़े होने के कारण ये आध्यात्मिक तौर पर भी महत्व रखती है। छठ पूजा पर अर्घ्य देने का महत्व
छठ के पर्व में तीन दिन ढ़लते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। यह एकमात्र ऐसा त्योहार है जहां शाम को सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा है। ऐसा सिर्फ शुरुआत के तीन दिन करते हैं। दरअसल शाम के समय सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं जो कि जीवन में संपन्नता का प्रतीक हैं। यही कारण है कि तीन दिन शाम को जल चढ़ाया जाता है। सूर्य की आराधना से, उन्हें अर्घ्य देने से रोक शोक का नाश होता है और भाग्य में भी वृद्धि होती है। इतना ही नहीं सूर्य आध्यात्मिक तौर पर भी आपको जागरुक होने में मदद करता है। यह धरती पर ऊर्जा का सबसे बड़ा सोर्स है जिससे मनुष्य ही नहीं सारे जीवधारियों को एनर्जी मिलती है।

सनातन धर्म के आस्था का महापर्व है 'छठ', धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक महत्व भी है खास

छठ पर्व पर सुबह को अर्घ्य देने का महत्व छठ के आखिरी दिन सुबह-सुबह अर्घ्य दिया जाता है। दरअसल सनातन धर्म में उगते सूर्य को अर्घ्य देने का बहुत महत्व है। यह आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। छठ के अंतिम दिन सुबह सूर्य को अर्घ्य उनकी पत्नी ऊषा के लिए दिया जाता है जो कि मनोकामना पूर्ण करती हैं। वेदों में भी सूर्य का महत्व बताया गया है। उन्हें संसार की आत्मा बताया गया है इसका कारण है कि सूर्य ही एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स है। इसलिए जब भी हम सुबह-सुबह सूर्य को अर्घ्य देते हैं उनकी पॉजिटिव एनर्जी को अपनी जीवन में आने का मौका देते हैं।
सूर्य को सुबह अर्घ्य देने से जीवन से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है। वहीं सुरक्षा की दृष्टिगत सीओ सदर अमर बहादुर के नेतृत्व व थाना प्रभारी अमरजीत चौहान के निगरानी में छठ मैइया के कार्यक्रम स्थल पर प्रशासन चुपके चुपके पर नजर बनाए रखें वही ग्राम प्रधान अशोक सिंह के द्वारा श्रद्धालुओं के लिए कंट्रोल रूम ड्रेसिंग रूम के साथ लाइटिंग का विशेष कार्य किया गया था इसके साथ निषाद समुदाय के महात्मा निषाद द्वारा अपने स्टैमरों से घाटों पर बराबर निरीक्षण करते रहे जिससे कि कोई अप्रिय घटना न घट सके

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