चौथी बार गंगा के जलस्तर में फिर वृद्धि से क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति
बाढ़ के चपेट में आए किसानों के माथे पर दिखाईं दी चिंता की लकीरें
रिपोर्टर जयदीप उपाध्याय
कछवा मीरजापुर। मझवा विकास खंड के गंगा के किनारे बसे किसानों एवं आम लोगों ने अभी बाढ़ के दंश को भूल भी नहीं पाये थे कि चौथी बार फिर बाढ़ का खौफ उन्हें सताने लगा है। गंगा के जलस्तर में लगातार पांच दिनों से बेतहाशा वृद्धि होने से एक बार फिर बाढ़ की स्थिति बनती हुई नजर आ रही है। गुरुवार को गंगा के जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि देखी गई है जो 76 मीटर से ऊपर बह रही है। मझवा विकास खंड के लोग इस साल खूब बाढ़ बारिश पीड़ित हुए। किसानों की बाढ़ से मक्का, मिर्च, अरहर, मूंग, मूंगफली, उड़द, कोहड़े की खेती चौपट हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी। अभी मझवा क्षेत्र के धन्नूपुर, पिपराही, जलालपुर , बरैनी, कछवा डीह, बजहा ,केवटावीर, महामलपुर, के किसान बाढ़ की दंश को भूल भी नहीं पाये थे कि फिर से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो गई है। क्षेत्र में बाढ़ खत्म होने के कुछ दिन बाद किसान किसी तरह से अगली फसल मटर की बुआई की तैयारी कर रहा है और कुछ किसानों ने तो कर्ज लेकर मटर,उरद ,कोहडे, मिर्च की खेतों में रोपाई भी कर दी है। वही फिर से बाढ़ आ गया है किसानों की इस साल कमर टूट सी गई है। मालूम हो कि क्षेत्र के किसानों का पूरा परिवार खेती पर आश्रित रहता है यदि इसी तरह से उनकी दैवी आपदा से फसल बर्बाद होते रहे तो उनके परिवार को खाने के लाले पड़ जाएंगे ऐसी स्थिति में अब सरकार किसानों के प्रति क्या निर्णय लेती है। यह वक्त ही बताएगा लेकिन इस समय उनकी हालत बत से बेहतर हो गई है।
................. विंध्याचल सगरा में डूब छेत्र है लेकिन स्थानीय लेखपाल महोदय का पूरा दया दृष्टि है प्लाटरों पर जिसके कारण कई मकान बन चुके हैं। वहीं अब बने हुए मकान का नक्शा पास कैसे हो उसपर भी काम किया जा रहा है। मिली जानकारी अनुसार बंजर भूमि घोषित किया गया है लेकिन काम चल रहा है। ज़मीनों का क्रय विक्रय हो रहा है लेकिन संबंधित विभाग गहरी निद्रा में सो रहे हैं। आखिर कब अवैध प्लाट पर जिला प्रशासन की कार्यवाही होगी यह देखने वाली बात होगी
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