पूर्व IAS संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे ने सीट के विवाद में एक मुसाफिर की पीटकर हत्या कर दी.
दिल्ली : पवन शर्मा (48) मेट्रो में सवार थे. ट्रेन में बुजुर्गो के लिए आरक्षित सीट को लेकर पूर्व IAS संजय प्रताप सिंह और उनके बेटे सिद्धार्थ से उनकी बहस हुई. पवन को थप्पड़ मारा गया. धक्का दिया गया और फिर उनकी बेरहमी से पिटाई की गयी. पवन की मौत हो गयी.
पुलिस ने पूर्व IAS और उनके बेटे को गिरफ्तार किया है. दिल्ली सरकार में तैनात रहे आरोपी IAS को 2015 में रिश्वत लेते हुए CBI ने गिरफ्तार किया था. उनका बेटा वकील है.
................. BREAKING NEWS ???? मीरजापुर - चील्ह टोटो को बचाने में पलटी दर्शनार्थियों से भरी बोलेरो, बाल-बाल बचे एक दर्जन लोग मीरजापुर-औराई मार्ग पर शेख डडीया के पास हादसा, वाराणसी से विंध्याचल जा रहा था परिवार। समाजसेवी रवि यादव ने पहुंचाया अस्पताल, सभी की हालत सामान्य। ............ जौनपुर में पूर्व ग्राम प्रधान के भाई की हत्या, स्कूल परिसर में मिला शव जौनपुर के सुजानगंज क्षेत्र में पूर्व ग्राम प्रधान के भाई ओमप्रकाश मिश्र उर्फ पप्पू मिश्र (55) की हत्या से सनसनी फैल गई। सोमवार सुबह हिम्मतनगर स्थित स्कूल परिसर में उनका शव मिला। परिजनों ने शव घर पर रखकर हत्याकांड का जल्द खुलासा करने और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
.......... मोहम्मद कमरुद्दीन पाकिस्तानी नागरिक थे। वे इस्लामाबाद से ढाका और फिर बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते असम में दाखिल हुए। उनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट था। उसके बाद, उन्हें सभी ज़रूरी भारतीय दस्तावेज़ दिए गए। उनका नाम वोटर लिस्ट में भी आ गया। चूंकि उन्हें फंडिंग मिल रही थी, इसलिए वे जल्द ही 'सोशल वर्कर' बन गए। 1996 में, उन्होंने असम के जमुनामुख विधानसभा क्षेत्र (नंबर 90) से विधानसभा का चुनाव भी लड़ा! उस समय, राजीव गांधी के पूर्व कैबिनेट सचिव और गांधी परिवार के दरबारी टी.एन. शेषन, मुख्य चुनाव आयुक्त थे! और, दिलचस्प बात यह है कि टी.एन. शेषन, जिन्होंने एक 'पाकिस्तानी घुसपैठिए उम्मीदवार और बांग्लादेशी घुसपैठिए मतदाताओं' को लोकतंत्र को कमजोर करने की अनुमति दी, को उस समय 'मजबूत, सख्त और ईमानदार अधिकारी' के रूप में बड़े पैमाने पर पीआर दिया गया था! कुछ लोग अभी भी उस नशे से बाहर नहीं आ पाए हैं। खैर, चूंकि टी.एन. शेषन का विषय आया है, तो मुझे एक और जानकारी साझा करने दें। पी.वी. नरसिम्हा राव सरकार ने इलेक्शन कमीशन में बदलाव किए और दो और कमिश्नर अपॉइंट किए। आज हम जो तीन इलेक्शन कमिश्नर का सिस्टम देखते हैं, वह उसी समय शुरू हुआ था। ध्यान से देखें: उन्हें ‘नरसिम्हा राव ने अपॉइंट किया था, कांग्रेस ने नहीं’! गांधी परिवार नरसिम्हा राव से बहुत नाराज़ था, और यह कई दूसरी बड़ी वजहों में से एक थी। उस समय के CEC टी.एन. शेषन के ज़रिए, गांधी परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में बाकी दो इलेक्शन कमिश्नरों को CEC के बराबर पावर देने के फैसले को चैलेंज किया! आज, जो लोग यह कह रहे हैं कि दोनों कमिश्नरों के साथ गलत हुआ, उन्होंने ही सुप्रीम कोर्ट में इसी सिस्टम को चैलेंज किया था। इस केस की सुनवाई पांच जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने की, और 14 जुलाई 1995 को कोर्ट ने एकमत से (5-0) कांग्रेस के शेषन की पिटीशन खारिज कर दी और कई सदस्यों वाले इलेक्शन कमीशन के स्ट्रक्चर को सही ठहराया, साथ ही फैसले लेने के प्रोसेस में चीफ इलेक्शन कमिश्नर और दूसरे इलेक्शन कमिश्नरों की बराबर हिस्सेदारी को भी सही ठहराया। (ज़रूरी: कोर्ट ने इसी फैसले के ज़रिए बहुमत से लिए जाने वाले फ़ैसलों के नियम को भी सही ठहराया था। इस मामले में, चुनाव आयोग कोर्ट में 1995 के इसी फैसले पर भरोसा करेगा। फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में राय में अंतर या असहमति हो सकती है। लेकिन SIR के बारे में लिए गए सभी फ़ैसलों में, बहुमत या एकमत से जो भी फ़ैसला हुआ, उसे आखिर में लागू किया गया।) अब हम मुख्य मुद्दे पर वापस आते हैं। भारत में चुनाव लड़ने वाला एक पाकिस्तानी उम्मीदवार कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी। जैसे-जैसे समय बीता, हालात और खराब होते गए। एक अलग मामले (‘सायरा बेगम और अन्य बनाम असम सरकार’) में, गुवाहाटी हाई कोर्ट के जस्टिस बी.के. शर्मा ने 2008 में रिकॉर्ड पर एक बहुत ही चौंकाने वाली बात कही थी — “असम में चुनाव कौन जीतेगा, यह तय करने में बांग्लादेशी नागरिक किंगमेकर बन गए हैं।” यह किसी BJP नेता ने नहीं, बल्कि खुद कोर्ट ने सारे स्टैटिस्टिक्स, डेटा और सबूतों की जांच करने के बाद कहा था!! --- SIR का विरोध करने वाले जानते हैं कि भारतीय वोटरों ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया है। इसलिए, वे चाहते हैं कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को फिर से वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए। लेकिन उन्हें यकीन है कि उनकी यह इच्छा पूरी नहीं होगी। वे चुनाव जीतने के लिए ज़मीन पर जाकर, लोगों के मुद्दे उठाकर और लोगों के लिए काम करके मेहनत नहीं करना चाहते। इन लोगों और जनता के बीच बहुत बड़ा ‘डिस्कनेक्ट’ है। यह ‘नाच नहीं सकते, तो फ़र्श को दोष दे रहे हैं’ वाली दयनीय स्थिति है। इसलिए, यह समझें: वोटर लिस्ट के ‘शुद्धिकरण’ का विरोध सिर्फ़ एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है! कांग्रेस पिछले 26 साल से ओडिशा में, 33 साल से त्रिपुरा में, 36 साल से गुजरात में, 36 साल से बिहार में, 37 साल से उत्तर प्रदेश में, 49 साल से बंगाल में और 59 साल से तमिलनाडु में एक बार भी सरकार नहीं बना पाई है। क्या कांग्रेस यह सब सिर्फ़ चुनाव जीतने के लिए कर रही है? नहीं। वे अब प्लान B पर आ गए हैं। उन्हें 100% यकीन है कि जब तक मोदी हारते नहीं या हटाए नहीं जाते, उनका सत्ता में आना नामुमकिन है। BJP कुछ हद तक बेफिक्र और ओवरकॉन्फिडेंट थी, जिससे 2024 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा मौका बन गया। उन्होंने इसे गंवा दिया। उसके बाद, BJP ने लगभग हर अगले असेंबली चुनाव (अपवाद — तमिलनाडु और केरल) में दिखाया है कि BJP और मोदी आमतौर पर ऐसे मौके नहीं देते हैं। इसीलिए, बंगाल चुनाव के बाद, कांग्रेस ने प्लान B एक्टिवेट किया — पहले अफरा-तफरी, फिर सिविल लड़ाई, फिर देश का फिर से बंटवारा, और फिर उन टुकड़ों में से एक पर राज करना! पहला कदम है: लोगों का डेमोक्रेसी और कॉन्स्टिट्यूशनल संस्थाओं में भरोसा खत्म करना! क्या कांग्रेस आज ठीक यही नहीं कर रही है? शांति से सोचिए। --- एक आसान सा एक्सपेरिमेंट करके देखिए — अपने फैमिली ग्रुप, सोसाइटी ग्रुप या दोस्तों के WhatsApp ग्रुप में पूछिए कि क्या किसी का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। 4–5 ग्रुप में पूछिए और आपके पास लगभग एक हज़ार लोगों का सैंपल साइज़ होगा। मैं आपको गारंटी देता हूँ कि आपको एक भी ऐसा इंसान नहीं मिलेगा जिसका नाम डिलीट किया गया हो! ???? इसीलिए मैं कह रहा हूँ... अगर आप नहीं चाहते कि कोई दूसरा पाकिस्तानी मोहम्मद कमरुद्दीन भारत में चुनाव लड़े... और अगर आप नहीं चाहते कि बांग्लादेशी घुसपैठिए मोहम्मद कमरुद्दीन जैसे किसी को असेंबली या पार्लियामेंट में भेजें... तो SIR के खिलाफ प्रोपेगैंडा का शिकार न हों! एक भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के तौर पर, मैं ज्ञानेश कुमार को अपना पूरा सपोर्ट देता हूँ!! जय हिंद .............. पूर्व जिलाधिकारी दिब्या मित्तल ने जनपद में अपनी राजनीतिक यात्रा आज से प्रारम्भ कर दिया है । बताया जाता है कि कल दुर्गाबाजार शिव इंटर कालेज के पास रहने वाले अमर अग्रवाल का हार्टअटैक से देहांत हो गया था आज दिब्या मित्तल उस परिवार से मिलकर अपनी शोक संवेदना ब्यक्त किया। शोक संवेदना ब्यक्त करने वालो में ध्रुव अग्रवाल आनन्द अग्रवाल तथा अन्य लोग शामिल रहे।
................... गजबै हाल है.. कुत्ता,भैस तक रिश्वत में मांग ले रहे है..!!???? प्रयागराज : STF में तैनात दरोगा रणेन्द्र कुमार सिंह ने रिश्वत में 2 गाय, एक जर्मन शेफर्ड कुत्ता और भैंस मांगी। कुर्सी-मेज खरीदने के लिए 35 हजार रुपए भी देने को कहा। दरोगा रणेन्द्र कुमार सिंह ने मनवीर सिंह से कहा कि यह सब देने पर उसका नाम शराब तस्करी के मुकदमे से बाहर कर देगा। दरोगा के खिलाफ हरियाणा के हिसार में एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता मनवीर सिंह ने दरोगा से बातचीत की 45 ऑडियो रिकॉर्डिंग और स्क्रीनशॉट हरियाणा के एंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपे। जांच में रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्य सही पाए गए। इसके बाद 6 अक्टूबर को दरोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। .............. जफर मिर्जापुरी की याद में कवि गोष्ठी आयोजित मिर्जापुर। वरिष्ठ शायर मरहूम जफर मिर्जापुरी की याद में एक कवि गोष्ठी /मुशायरा का आयोजन उनके बड़े सुपुत्र तारिक़ ज़फ़र के निवास तरकापुर में रविवार को किया गया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ शायर मुहिब मिर्जापुरी ने की और संचालन खुर्शीद भारती ने किया। गोष्ठी में ज़फ़र साहब को एक सरल मिलनसार और सभी से मोहब्बत करने वाला व्यक्तित्व बताया बता कर उनकी शायरी की प्रशंसा की गई। उनका एक शेर संचालक ने पढ़कर सुनाया जो यूं था- 'किस्मत ने ताजदार बनाया नहीं मगर , कहने को तो मुझे भी जफर कह दिया गया।' उनके पर पुत्र अयान तारिक़ ने जफर मिर्जापुर की एक ग़ज़ल पढ़ कर सुनाया । तत्पश्चात मुशायरा का दौर शुरू हुआ, जिसमें सबसे पहले सैफ रज़ा ने नातिया कलाम सुना कर महफिल का आग़ाज़ किया। तारीक ज़फ़र के बेटे ने अपने दादाजी जफर मिर्जापुर की ग़ज़ल सुना कर वाह वाही लूटी। इस मौके पर इरफान कुरैशी, फरहान अफजल , कैफियात मिर्जापुरी, दानिश ज़ैदी,खुर्शीद भारती, और मुहिब मिर्जापुरी ने अपनी शायरी से मेहफिल को रौनक बख्शा।
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