????राम जन्म भूमि दान गबन केस, अब तक 79 लाख 85 हजार 493 रुपये की रिकवरी,
आरोपियों को 3 दिन की न्यायिक अभिरक्षा,
अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले के आठ आरोपियों को शुक्रवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में रिमांड मजिस्ट्रेट के न्यायालय में पेश किया गया. मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में सभी की 3 दिन की न्यायिक अभिरक्षा का रिमांड मंजूर हुआ. इसके बाद पुलिस ने सबको जेल भेज दिया. अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा ने बताया कि सभी अभियुक्तों की निशानदेही पर बरामद 79 लाख 85493 रुपए भी पेश किए गए.
अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा ने बताया कि मामले की रिपोर्ट श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने राम जन्मभूमि थाने में अनुकल्प मिश्रा पुत्र रविंद्र कुमार मिश्रा (निवासी कौशलपुरी कॉलोनी, मानस डेंटल के बगल थाना कोतवाली नगर), करुणेश पांडेय पुत्र रामदास पांडेय (निवासी जयराजपुर थाना खंडासा) मनीष कुमार यादव पुत्र स्वर्गीय सुधीर कुमार यादव (निवासी स्वर्गद्वार नया घाट थाना कोतवाली अयोध्या) लवकुश मिश्रा पुत्र राजेश कुमार मिश्रा (निवासी ठकुराइन खगोली थाना कोतवाली) रुदौली रमाशंकर मिश्रा (निवासी प्राचीन सीताराम मंदिर नया घाट थाना कोतवाली अयोध्या) अविनाश शुक्ला पुत्र राम सजीवन शुक्ला (निवासी कौशलपुरी मधुबन डेरी के पास थाना कोतवाली नगर) रामशकर यादव उर्फ टिन्नू स्वर्गीय सुंदरलाल श्रीवास्तव (निवासी बैंकर्स लाइन अनजनीपुरम कॉलोनी देवकाली रोड थाना कोतवाली नगर) के खिलाफ 305 ए, 306, 317 (2) 317(5) 316(5) 61(2) ए 3(5) भारतीय न्याय संहिता तथा धारा 13(1) (A) 13(2) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज कराई थी. इसमें मामले के विवेचक ने कोर्ट मे सभी आरोपियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के तहत अदालत में पेश किया
रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष मंदिर में सभी अभियुक्तों की निशानदेही पर बरामद किए गए 79 लाख 85493 रुपए भी पेश किए गए. अदालत ने विवेचक द्वारा प्रस्तुत किए गए समस्त प्रपत्रों का सम्यक परिशीलन करने और अभियोजन अधिकारी की बहस सुनने के बाद सभी आरोपियों को तीन दिन के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया. क्योंकि मामले में भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं, इसलिए सभी आरोपियों को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कोर्ट में रिमांड के लिए प्रस्तुत किया जाएगा.
पेशी के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. क्षेत्राधिकारी अयोध्या तथा क्षेत्राधिकारी नगर के नेतृत्व में भारी संख्या में सुरक्षा बालों की तैनाती की गई थी. रिमांड आदेश मिलने के बाद सभी
............................................. ???? बड़ी खबर???? निलंबित तहसीलदार के ठिकानों पर ACB की रेड, 20 करोड़ से ज्यादा की बेनामी संपत्ति ज़ब्त तेलंगाना के शमीरपेट में एंटी करप्शन ब्यूरो ने रिश्वतखोरी के मामले में जेल में बंद निलंबित महिला तहसीलदार थुम्माकोम्मा सुचरिता के परिसरों पर छापेमारी कर अकूत संपत्ति का पर्दाफाश किया है। तलाशी में ₹12 लाख नकद, ₹1.20 करोड़ के गहने, हैदराबाद व सिद्दीपेट में कई फ्लैट-जमीन और लग्जरी कारें मिलीं, जिनका कुल बाज़ार मूल्य ₹20 करोड़ से अधिक बताया जा रहा है। मामले में आगे की जांच जारी है ............................................. मिर्जापुर के चौबे टोला स्थित संतोष इलेक्ट्रॉनिक में रविवार सुबह अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग मौके पर जुट गए। सूचना पर दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचकर आग बुझाने में जुट गईं। आग लगने के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल सका है। घटना में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है
.................................................. वाराणसी से दर्शन कर कर लौट रहे श्रद्धालुओं की फोर व्हीलर दुर्घटना की शिकार सड़क दुर्घटना में पति-पत्नी की मृत्यु 5 गंभीर रूप से घायल डामड गंज दुर्घटना बहुल क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध डामड गंज में सड़क पर खड़े ट्रक में वाराणसी से लौट रही आर्टिका कार घुस गई और दर्दनाक हादसा हो गया जिसमें पति-पत्नी की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए प्राप्त जानकारी के अनुसार डामड गंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग पर ग्राम लाहुरिया दह के पास हाईवे के किनारे खड़ी ट्रक में आर्टिका कार संख्याMP21zd7405 पीछे से ट्रक में घुस गई जिसमें कार में सवार विकास कुमार पुत्र धानु ताम्रकार उम्र लगभग 35 वर्ष सोनम ताम्रकार पत्नी विकास उम्र लगभग 32 वर्ष निवासी गण ग्राम बगही जनपद कटनी मध्य प्रदेश की मौके पर ही मौत हो गई तथा कार चालक हीरालाल पुत्र अवंती उम्र लगभग 23 वर्ष निवासी छीदिया थाना बगही जनपद कटनी मध्य प्रदेश और सक्षम पुत्र प्रहलाद उम्र करीब 17 वर्ष राधा पुत्री प्रहलाद 4 वर्ष शिवांश उम्र करीब 4 वर्ष रुद्रा उम्र 2 पुत्र विकास ग्राम बगही थाना बरही जनपद कटनी मध्य प्रदेश घायल हो गए इस खतरनाक घटना की सूचना पाकर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची घायलों को सी एच सी लालगंज भिजवाया गया जो दुर्घटना स्थल से लगभग 30 किलोमीटर दूर हैऔर मृतक के शवो को कब्जे में लेकर अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है ज्ञात हो स्थानीय बाजार में चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है इसलिए गंभीर रूप से घायलो के लिए मात्र जिला अस्पताल है जो बाजार से 50 किलोमीटर दूर है जाहिर है वहां तक पहुंचते-पहुंचते अधिकांश मरीजों की मौत हो जाती है यहां के स्थानीय निवासी कई बार शासन एवं प्रशासन को स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के उच्ची करण का प्रार्थना पत्र संबंधित विभाग को दे चुकी है कई बार समाचार पत्रों में भी समाचार प्रकाशित हो चुका है लेकिन प्रशासन को पता नहीं कितने मौतो का इंतजार है जनपद के पिछड़े हुए क्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध क्षेत्र का कब उद्धार होगा बुनियादी समस्याओं का कब समाधान होगा इसका क्षेत्र की जनता को बेताबी से इंतजार
................................................................................. बौद्धिक सत्र हिन्दू साम्राज्य दिनोत्सव शिवाजी के जन्म के समय इस देश की स्थिति बड़ी भयानक थी। समूचा वैभव पैरों तले रौदा जा रहा था। पवित्र मूतियों के टुकड़े-टुकडे कर दिये जा रहे थे। प्रतिदिन हजारो गाय काटी जा रही थी। नदियों में खून बहाया जा रहाथा। शैतान की सल्तनत का अमल जुल्म की चरम सीमा पर था। सुल्तान की नौकरी भूषण बन गयी थी। पीर और फकीरों की पूजा-अर्चना तथा उर्स जुलूस की भरमार थी। गुलामी ने स्वत्व की भावना को इस तरह समाप्त कर दिया था कि हिन्दू भी सुल्तानराव, फकीर राव आदि नाम धारण करने में भूषण मानने लगे थे। सारा समाज व्यथित था, दुखी था। किसी प्रतापी पुरूष के आगमन की उसे बड़ी उत्कंठा से प्रतीक्षा थी। ठीक इसी समय शक संवत् १५५१ के फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष तृतीया की प्रातः काल, शिवनेरी किले में माता जीजीबाई ने शिवा जी को जन्म दिया। पण्डितों ने भविष्यवाणी की। यह नवजात बालक दिग्विजयी होगा। इस श्रांत धरती माता को यह शान्त करेगा। इससे भारतवर्ष की कीर्ति, यश, प्रताप एवं महिमा बढ़ेगी। रामायण-महाभारत की कथाओं ने शिवाजी के बाल मन पर गहरा असर किया। जैसे-जैसे वह बड़ा होता गया, नये-नये प्रश्न उसे सताते रहे। यह मन्दिर क्यों और कैसे धरासायी हुआ? किसने ये घर जलाकर राख कर दिये? हमारे लोग इतने गरीब, दीन और लाचार कैसे बन गये? समाज पर होने वाले अत्याचार देख सुनकर बाल शिवाजी ने अपना जीवन ध्येय निश्चित कर लिया।झुका नहीं। पूना और आसपास का इलाका शिवा जी की गतिविधियों का केन्द्र बना। दादा जी कोंडदेव ने उन्हें प्रशासन का पाठ दिया। रोहिडेश्वर के देवालय में उन्होंने हिन्दवी स्वराज स्थापना की शपथ ली। मावल प्रदेश में उन्होंने बड़ा मित्र परिवार इकट्ठा किया। उनकी शिवा जी पर अटूट श्रद्धा और भक्ति थी। शिवा जी ने उनसे कहाः 'यहां स्वराज्य की स्थापना करके रहूँगा'। स्वराज्य स्थापना के कार्य का शुभारम्भ हुआ। तोरण किला को लेकर फिर राजगढ़ कोंडाण आदि एक के बाद एक अनेक किले शिवाजी ने अपने कब्जे में कर लिया। शिवाजी स्वराज्य स्थापना में व्यस्त थे कि उधर बीजापुर में श्रावण पूर्णिमा की एक रात को मुस्तफा खान और बाजी घोरपड़े ने दगाबाजी कर पिता शाहजी राजा को कैद कर लिया। शिवाजी ने ईट का जवाब पत्थर से दिया। मुगल बादशाह से मिला जान का डर दिखाकर उन्होंने अपने पिता को शत्रु की कैद से मुक्त करा लिया। जावली का चन्द्रराव मोरे बगावत पर उतर आया। कहने लगा, 'तुम्हें किसने राज्य दिया? तुम कैसे राजा बने?' 'शिवा जी ने उसे कड़ा जवाब भेजा। सीधी तरह से जावली को हमारे स्वाधीन कर बँधे हाथ हमारे सामने हाजिर हो जाओं, वरना गाड़ दिये जाओंगे। वैसे ही हुआ। जावली पर कब्जा कर लिया। चन्द्र राव मोरे का खात्मा कर दिया। शिवाजी की धाक सर्वदूर फैल गयी। रायगढ़ पर भगवा झण्डा फहराया। अपने बहादुर साथियों को अलग मोचीं पर रवाना कर दिया। ४० किले शिवा जी के अधीन हो गये। गोवा में शिवा जी को एक दुधारी तलवार मिली। यही थी उनकी भवानी तलवार। शिवा जी की शरारत खत्म करने का बीड़ा उठाकर अफजल खान बीजापुर से निकल पड़ा।किन्तु कूटनीति और युद्धनीति में निपुण शिवा जी उसे जावली के जंगल से प्रतापगढ़ तक खींच लाये। मार्गशीर्ष मास की शुक्ल सप्तमी के दिन खान से भेंटकर उसी क्षण उसे मौत के घाट उतारा। खान की बड़ी भारी फौज का सफाया कर दिया। सुल्तान का दम ही उखाड़ दिया। अब विरोध में खड़ा हुआ साक्षात् दिल्ली का बादशाह औरंगजेब। उसके आदेश पर शाहिस्ता खाँ ने पूना के लाल महल में डेरा डाला। शिवाजी ने वहाँ घुसकर उसकी उँगलियाँ काट दी। खान औरंगजेब का कोपभाजन बना और उसे दण्डस्वरूप बंगाल भेज दिया गया। स्वराज्य स्थापना में जिन्होंने गद्दारी की उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी गई। खंडोबा का एक हाथ और एक पैर काट दिया गया। बाजी घोरपड़े का शिवाजी ने अपनी भवानी तलवार से शिरोच्छेद कर दिया। इब्राहिम खान नामक एक सरकार ने कूड़ाल की लड़ाई में बड़ी वीरता दिखाई। शिवाजी ने उसकी मुक्त कण्ठ से सराहना की। शिवाजी ने जहाजी बेड़ा मजबूत बनाया। जलदुर्ग बाँधे। वसनूर में तोपों के कारखाने लगाये। स्वराज का विस्तार हो रहा था। इस कार्य में शिवा जी के कतिपय वीर काम आये। तानाजी, वाजीप्रभु, मुरारबाजी जैसे कई साथी लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गये। शिवाजी की बगावत को खत्म करने के इरादे से मिर्जा राजा जयसिह स्वयं दक्षिण में उतर आये। स्वराज्य में आतंक मचा दिया। शिवाजी ने मिर्जा राजा जयसिंह को एक पत्र लिखा, तत्पश्चात जयसिंह से भेंट हुई और आगरा जाने का प्रस्ताव हुआ, शिवाजी महाराज आगरा क्यों गये होंगें? शाइस्ता खाँ, अफजल खाँ की तरह औरंगजेब को भी प्रत्यक्ष भेंट में ठिकाने लगाकर समूचे देश को मुक्त करना है और सम्पूर्ण भारतवर्ष में हिन्दवी स्वराज्य प्रतिस्थापित करना, इसके अतिरिक्त अन्य कौन सा विचार शिवाजी के मन में हो सकता है? यही विचार मस्तिष्क में रखकर उन्होंने पूना से लेकर आगरा तक स्थान-स्थान पर अपने निष्ठावान और विश्वासपात्र लोग तैनात कर दिये। किन्तु शिवाजी की यह योजना सफल नहीं हो पाई और आगरा की कैद से बड़ी कुशलता से भागकर बैरागी के वेश में वे रायगढ़ लौटे। औरंगजेब क्रोध से आग बबूला हो गया। उसने मिर्जा राजा से बदला लिया। नेताजी पालकर को कैद कर उसे मुसलमान बना दिया। शिवाजी ने बड़ी दूरदर्शिता से नेताजी पालकर को सम्मान के साथ हिन्दू धर्म में ले लिया। एक नेताजी नहीं ऐसे कइयों को शिवाजी ने स्वधर्म में वापस ले लिया। आगरा से लौटने के उपरान्त स्वराज्य का बहुत सारा प्रदेश शिवाजी ने फिर अपने कब्जे में कर लिया। स्वराज्य में सुराज्य की स्थापना की। प्रत्येक क्षेत्र में मौलिक क्रान्ति की। समाज में रामराज्य की स्मृतियाँ जगीं । यह क्रान्ति पूर्णतः हिन्दू समाज जीवन तथा राष्ट्र जीवन मूल्यों पर आधारित थी। शिवाजी महाराज मानवता के सशक्त संरक्षक थे। सभी धर्म तथा सदाचार को उनका संरक्षण प्राप्त था। परन्तु हिन्दुत्व पर आक्रमण उन्होंने कभी सहन नहीं किया। दक्षिण में कुछ मन्दिर गिराकर वहाँ मस्जिदें बनाई गई थी। शिवाजी ने उन मसजिदों को हटाकर वहाँ पुनः मंदिरों की प्रतिस्थापना की। अधिकारियों को उन्होंने कडे अनुशासन में रखा। गद्दारी, घूसखोरी, मुनाफाखोरी, धन के उपहार आदि पर उन्होंने कड़ा नियंत्रण रखा। राज्य में कोई भूखा, निराश्रित अथवा बेघर न रहने पाये इस पर उनका सूक्ष्म ध्यान था। शिवाजी के शासन की आधार थी-गुणवत्ता । गुणी जनों का वे आदर करते थे। उन्हें आश्रय दिया जाता था। कल्याण के सूबेदार की रूपवती पुत्रवधु को लूट में पाने पर भी शिवाजी ने उसे वस्त्रालंकारों से विभूषित करते हए बड़े सम्मान के साथ वापस उसके घर पहुंचा दिया। शिवाजी महाराज हिन्दुओं के इस धर्म राज्य के अर्थात् हिन्दवी स्वराज्य के केवल उपभोगशून्य स्वामी थे। उत्तर भारत में होने वाले औरंगजेबी अत्याचारों की व्यथा शिवाजी के मन को निरन्तर सालती थी। मूतियाँ तोड़ दी जा रही, जबरदस्ती धर्मभ्रष्ट किये जा रहे थे। क्षेत्रराज काशी पर आक्रमण हुआ। बुतशिकन शमशेर जंग की फौज श्री विश्वेश्वर मन्दिर में घुस गई, बिन्दु माधव का मन्दिर तोड़ कर गिरा दिया गया। मथुरा का केशवले मंदिर ध्वस्त कर दिया गया। सौराष्ट्र में सोमनाथ पुनः एक बार भग्न हआ। छत्रसाल शिवजी से मिलने आये। उन्होंने शिवाजी को हिन्दुओं पर होने वाले जुल्मों की कहानी सुनाई। शिवाजी ने उनसे कहा आप तो क्षत्रियों के सरताज है। आप बुन्देलखण्ड में जाकर अपनी मातृभूमि को मुक्त कीजिए। स्वदेश में स्वराज्य प्रस्थापित करिये। विजय आपकी होगी। अतुलनीय पराक्रम, असीम त्याग जाज्वल्य निष्ठा, विस्मयकारक कारनामें, अनाकलनीय साहस, उत्तुंग महत्वाकांक्षा-इन गुणों के बल पर शिवाजी तथा उनके साथियों ने इस भूमण्डल पर ३० वर्ष में आसाधारण क्रांति कर दिखाई। शिवाजी की कीर्ति-यश दशों दिशाओं में फैल गई- 'राजा शिवा जी धर्म स्थापना के लिए स्वराज्य प्रस्थापित कर रहे है। वे प्राचीन राजाओं की मालिका में शोभायमान पुण्य श्लोक पुरूष है। 'काशी के वेदपण्डित गागाभट्ट शिवा जी से मिलने आये। उन्होंने देखा कि शिवाजी का राज्याभिषेक हुए बिना उनकी महत्ता को दुनिया नहीं जान पायेगी। उन्होंने शिवाजी से कहा - 'धर्म की आज्ञा है कि सिंहासन पर बैठें। शिवाजी को भी उनकी यह बात जंची। सभी के मन में यही बात थी। इसलिए चारों ओर आनन्द एवं उत्साह की लहरें उमड़ पड़ी। सिंहासन के लिए रायगढ़ का स्थान निश्चित हुआ। राजसभा सिद्ध हुई। ३२ मन सोने का सिंहासन तैयार किया गया। उस पर अमूल्य रन जड़े गये। मुहूर्त निश्चित हुआ, शक संवत् १५९६ ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी शनिवार के दिन सूर्योदय के पूर्व ३ घटिका उषः काल में। भारतवर्ष की सप्तगंगाओं का जल, समस्त सागर तथा पवित्र तीथीं का जल लाकर शिवाजी का अभिषेक किया गया। शिवाजी महाराज सिंहासन पर विराजमान हुए। कोटि-कोटि कंठों के स्वर से जयध्वनि गूंजी छत्रपति शिवाजी महाराज की जय।' छत्रपति की मुहर सार्थक हुईः । प्रतिपच्चन्द्ररेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववन्दिता । शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते ।। अष्टप्रधान मण्डल नियुक्त हुआ। संस्कृत नामावली का प्रयोग हुआ। राज-व्यवहार कोष तैयार हुआ। सही अर्थ में स्वराज्य अवतीर्ण हुआ, शिवाजी महाराज का अपार वैभव देखकर देखने वालों की आँखें चकाचौंध हो गईं। उनके मन को संतोष हुआ। बाल शिवाजी का स्वप्न साकार हुआ। माता जीजाबाई धन्य हुई। जय - ध्वनि की गूंज दशों दिशा में गूंज उठी। किन्तु यह समारोह केवल वैभव प्रदर्शन मात्र नहीं था। पराभूत मनोवृत्ति का शिकार बनी हिन्दू जाति को संजीवनी देने वाली यह घटना थी। हिन्दू जाति केवल गुलामी में जीने-मरने के लिए पैदा नहीं हुई। प्रबल आक्रमणकारी को नेस्तनाबूत करके अपना सिंहासन निर्माण करने का सामर्थ्य उसमें है, इस बात को शिवाजी ने सिद्ध कर दिया। सारे विश्व को इस बात का प्रमाण दिया। यह स्मृति आज भी प्रेरणादायी है। राज्याभिषेक के समारोह को आज ३५० से अधिक वर्ष हो गये। बीच का कुछ काल दासता में बीता। किन्तु अब समय बदल गया। परिस्थिति भी बदली है। अब न कोई राजा रह गया है, न ही कोई उसका सिंहासन ! प्रजा अब सार्वभौम है। जनतंत्र का उदय हुआ है। गत हजार-बारह सौ साल से चलता आ रहा आक्रमण हटाने में हम अभी तनिक सफल नहीं हुए है। उसे समाप्त कर अपना धर्म, अपनी संस्कृति और अपने समाज पर आक्रमण करने की हिम्मत भी कोई न कर पाये। इतना बलशाली और सुसंगठित समाज बनाना ही हमारा ध्येय है। यह सबका कार्य है। हिन्दू साम्राज्य उत्सव के अवसर पर हमको यह प्रतिज्ञा करनी चाहिए कि हिन्दू समाज को सुसंगठित और सामर्थ्य सम्पन्न बनाकर इस भारत भूमि पर समस्त विश्व के आधार स्वरूप हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करेंगे, यही छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का तथा राज्याभिषेक का शाश्वत संदेश है।? छत्रपति शिवाजी महाराज जी की जय। गुंजन चौधरी गर्ग जिला बौद्धिक प्रमुख
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