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बेखौफ कट रहा महुआ का विशाल पेड़, वन विभाग की अनुमति के बिना हरियाली पर चल रही आरी मीरजापुर / जिगना

बेखौफ कट रहा महुआ का विशाल पेड़, वन विभाग की अनुमति के बिना हरियाली पर चल रही आरी

मीरजापुर / जिगना

छानबे क्षेत्र के अंतर्गत गौरा,मजरा परमानपुर गांव में पर्यावरण संरक्षण के सरकारी प्रयासों को धता बताते हुए एक विशाल महुआ के हरे-भरे पेड़ को काटे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों से खड़ा यह पेड़ न केवल गांव की पहचान था, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए छाया और आय का भी प्रमुख स्रोत था।
बताया जा रहा है कि पेड़ को पहले काटकर गिरा दिया गया और उसकी हरी डाल-पत्तियों को ट्रैक्टर के जरिए मौके से ले जाया जा रहा है, जबकि उसका मोटा तना अभी भी जमीन पर पड़ा हुआ है। इस पूरी कार्रवाई को खुलेआम अंजाम दिया जा रहा है, जिससे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि यह कटान बिना किसी वैध अनुमति के की गई है। मिर्जापुर वन विभाग और लालगंज वन रेंज अधिकारी की ओर से इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिससे अवैध कटान करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
गौरतलब है कि एक ओर केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के माध्यम से वृक्षारोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मजबूती मिल सके।

.................................... शासन की मंशा के अनुरूप उपलब्ध बजट का समयान्तर्गत वित्तीय नियमों के अधीन उपयोग करते हुए देयक कोषागार में प्रस्तुत करते हुए समय समस्त बिंदुओं पर कार्यवाही करना करें सुनिश्चित मीरजापुर 24 मार्च 2026- शासनादेश संख्या 3/2026/ए-1-08-2026/10-31/4/2022 वित्त (लेखा) अनुभाग-1 लखनऊ दिनांक 12 मार्च 2026 के प्राविधानों के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2025.26 में आहरण वितरण अधिकारी के द्वारा प्रस्तुत होने वाले देयको का कोषागारों से समयान्तर्गत भुगतान सुनिश्चित हो सके, के दृष्टिगत निम्न निर्देशो का अनुपालन सुनिश्चत किया जॉय। शासनादेश संख्या 5/2026/ए-1-11/दस-2026-10-1099/276/2020 वित्त (लेखा) अनुभाग-1 लखनऊ दिनांक 17 मार्च 2026 के कम में दिनांक 31 मार्च 2026 (महावीर जंयती) को कोषागार/एजेन्सी बैंक की शाखाओं को खोले जाने के निर्देश प्राप्त है तद्कम में कोषागार दिनांक 31 मार्च 2026 (महावीर जंयती) को समान्य कार्य दिवस के भाति कोषागार / एजेन्सी बैंक खुले रहेगे। अभी तक के प्राप्त बजट के देयक दिनांक 25 मार्च 2026 तक ही कोषागार में स्वीकार किये जायेगे। 25 मार्च 2026 के बाद पुराने बजट के बिल कोषागार द्वारा पारित किया जाना सम्भव नही होगा। दिनांक 25 मार्च 2026 के बाद प्राप्त बजट के सापेक्ष देयक 31 मार्च को अपरान्ह 3:00 बजे तक ही कोषागार में स्वीकार किये जायेगे। साय 5 बजे तक कोषागार द्वारा फाइनल ट्रांजेक्शन अप्रूवल किया जायेगा। साय 5 बजे के बाद कोई भी ट्रांजेक्शन अप्रूवल किया जाना सम्भव नही हो पायेगा। जैसा की आप सभी अवगत होगे की प्रत्येक ट्रांजेक्शन की वैधता 10 दिन की होती है। कोषागार में केवल वैधता अवधि का ट्रांजेक्शन बिल कोषागार में प्रस्तुत किया जॉय। समस्त आहरण वितरण अधिकारी कोषागार में समस्त देयक बजट उपलब्धा के सापेक्ष टोकन जनरेट के उपरान्त देयक प्रस्तुत करना सुनिश्चित करे। बिना टोकन के कोई भी देयक कोषागार द्वारा स्वीकार नही किया जायेगा। शासनादेश संख्या 3/2026/ए-1-08-2026/10-31/4/2022 वित्त (लेखा) अनुभाग-1 लखनऊ दिनांक 12 मार्च 2026 के प्राविधानो के अन्तर्गत दिनांक 31 मार्च 2025 को आहरण वितरण अधिकारी द्वारा कोषागार में बिल प्रस्तुत करने तथा कोषागार द्वारा बिलो का पारण किये जाने हेतु समय सीमा निर्धारित की जाती है। यथा आहरण एवं वितरण अधिकारियों द्वारा कोषागार में बिल प्रस्तुत करने का समय पर हम 3:00 बजे तक कोषागार द्वारा ट्रांजैक्शन अप्रूवल करने का समय शाम 5:00 बजे तक निर्धारित है। शासन की मंशा के अनुरूप उपलब्ध बजट का समयान्तर्गत वित्तीय नियमो के अधीन उपयोग करते हुए उपरोक्तानुसार देयक कोषागार मे प्रस्तुत करते हुए समस्त बिन्दुओ पर कार्यवाही सुनिश्चित करने का कष्ट करें। उक्त का अनुपालन न करने तथा आहरण के अभाव में किसी धनराशि के व्यपगत् हो जाने पर सम्बन्धित आहरण एवं वितरण अधिकारी उत्तरदायी होंगें

.............................................................. बिहार में बीते कुछ महीनों के दौरान भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने आम जनता ही नहीं बल्कि जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। बिहार सरकारी विभागों में कार्यरत कई अधिकारियों के पास उनकी आय से कहीं अधिक संपत्ति मिलने के बाद यह साफ हो गया है कि सिस्टम के अंदर भ्रष्टाचार किस कदर जड़ें जमा चुका है।आर्थिक अपराध इकाई (EOU), विशेष सतर्कता इकाई (SVU) और निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई में बड़े खुलासे हो रहे हैं। सबसे चर्चित मामला 18 मार्च का है, जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के सात ठिकानों पर छापेमारी की। जांच के दौरान जो कुछ मिला, उसने सभी को चौंका दिया। रजक के पास से 31 जमीनों के दस्तावेज, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी, कई बैंक खाते, मकान, और यहां तक कि दार्जिलिंग से नेपाल तक फैली जमीन के सबूत बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि उनकी संपत्ति उनकी वैध आय से कई गुना अधिक है। फिलहाल उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। इसके पहले 13 मार्च को विशेष सतर्कता इकाई (SVU) ने एक अन्य लोकसेवक पंकज कुमार के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान उनके घर से करीब 32 लाख रुपये नकद और 1 करोड़ 31 लाख रुपये के हीरे, सोने और चांदी के आभूषण बरामद किए गए। छापेमारी के दौरान आरोपी ने खुद को बचाने के लिए जेवरात छिपाने और फेंकने की कोशिश भी की, लेकिन टीम की सतर्कता से सभी सामान जब्त कर लिया गया। इसके अलावा कई जमीनों के कागजात भी बरामद हुए हैं, जो उनकी अवैध संपत्ति की ओर इशारा करते हैं।(केयर अपडेट) पश्चिमी चंपारण के बेतिया में भी भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया था। यहां जिला शिक्षा परियोजना के सहायक अभियंता रोशन कुमार को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उनके पास से 42.5 लाख रुपये नकद बरामद हुए। इतनी बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद उनकी संपत्ति की भी जांच शुरू कर दी गई है। पटना में 2 फरवरी को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के सहायक निदेशक परमजय कुमार को 5 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि उन्होंने 10 लाख रुपये की मांग की थी और पहली किस्त लेते समय ही उन्हें पकड़ लिया गया। उनकी कार से नोटों के कई बंडल बरामद हुए, जो इस बात का संकेत देते हैं कि यह भ्रष्टाचार लंबे समय से चल रहा था। वहीं मुजफ्फरपुर में बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता अमन कुमार को भी रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। एक स्थानीय निवासी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पेवर ब्लॉक निर्माण के भुगतान को आगे बढ़ाने के लिए उनसे 9,000 रुपये की मांग की जा रही थी। शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए निगरानी टीम ने आरोपी को दबोच लिया। इन सभी मामलों ने यह साबित कर दिया है कि बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं, लेकिन साथ ही यह भी सवाल उठता है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर अवैध संपत्ति कैसे जमा हो रही है। लगातार हो रही छापेमारी से यह संकेत जरूर मिला है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं

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................................... मिर्ज़ापुर-मशीनरी एंड हार्डवेयर स्टोर की दुकान से दो बदमाशों ने 30 हजार रुपये की लूट की। सीसीटीवी फुटेज में बदमाशों की तस्वीरें मिली हैं, बदमाश बाइक से भागते हुए दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ने दावा किया है कि जल्द ही बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। चील्ह थाना क्षेत्र के पुरजागीर बाजार का मामला

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