मिर्ज़ापुर न्यूज़ एजेंसी
मिर्जापुर : अमृत फार्मेसी मेडिकल जिला अस्पताल में बना शो पिस, अमृत फार्मेसी पर नहीं मिलती पूरी दवाएं, बड़े धूम धाम से हुआ था अमृत फार्मेसी का उद्घाटन, केंद्रित मंत्री अनुप्रिया पटेल ने किया था अमृत फार्मेसी का उद्घाटन, केंद्रीय मंत्री के साख पर बट्टा लगा रहा अमृत फार्मेसी, कैशलेश सुविधा को लेकर प्रधानमंत्री ने दिया बढ़ावा, अमृत फार्मेसी नहीं लेता ऑनलाइन पेमेंट, बिना कैश दिए नहीं मिलती है अमृत फार्मेसी पर दवाएं, मिर्जापुर के मंडलीय चिकित्सालय का मामला।
मनीष रावत की रिपोर्ट
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वादकारियों से संबंधित मामलों को शीघ्र एवं सरल निस्तारण हेतु दिनांक 16, 17 एवं 18 अक्टूबर को आयोजित होगा मिनी लोक अदालत
मीरजापुर 13 अक्टूबर 2025- मा0 जनपद न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ll ने जारी अपने एक आदेश के तहत माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों के अनुक्रम में प्राचीनतम पत्रावलियों को शीघ्रातिशीघ्र निस्तारित किया जाना है। जनपद न्यायालय में लम्बित वादों के वादकारियों में से कुछ वादकारियों की संख्या ऐसी है, जो रोजी-रोजगार के सम्बन्ध में देश के दूरस्थ स्थानों पर कार्य करते हैं तथा त्योहारों पर ही घर आते हैं। दीपावली एवं छठ पर्व के दृष्टिगत, ऐसे वादकारियों से सम्बन्धित मामलों को शीघ्र एवं सरल निस्तारण हेतु दीपावली पर्व के अवकाश के पूर्व दिनांक 16.10.2025, 17.10.2025 एवं 18.010.2025 को मध्यावकाश के पश्चात् जनपद न्यायालय मीरजापुर में स्थित समस्त न्यायालयों तथा बाह्य स्थित न्यायालयों यथा, न्यायालय सिविल जज (जू०डि०), चुनार, मीरजापुरः न्यायालय ग्राम न्यायालय, मड़िहान, मीरजापुर व न्यायालय ग्राम न्यायालय, लालगंज, मीरजापुर में मिनी लोक अदालत का आयोजन किया जाना सुनिश्चित हुआ है।
अतः विद्वान सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मीरजापुर उपरोक्त तिथियों पर जनपद न्यायालय, मीरजापुर में मिनी लोक अदालत के आयोजन एवं प्रचार-प्रसार के सम्बन्ध में उचित व्यवस्थाएँ कराना सुनिश्चित करें।
/................... मुजफ्फरनगर : दिल्ली में SSP संजय कुमार वर्मा को राष्ट्रीय सम्मान, ऑनर ऑफ अशोक अवार्ड से SSP वर्मा सम्मानित हुए प्रशासनिक नेतृत्व और निष्ठा के लिए मिला अवार्ड. .......................... विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को लेकर प्रबुद्धजनों,व्यापारियों, सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों ने दिए सुझाव नगर के जाम से मुक्त करने के लिए नगर में मल्टी लेवल पार्किंग,ओझला पाथ वे,माधोसिंह क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज,स्वदेशी अपनाने,सड़कों के चौड़ीकरण,पालिका की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बनाकर इंडस्ट्रीज की स्थापना, शिक्षा में तकनीक को बढ़ावा देने के साथ कई और सुझाव मिले मीरजापुर।नगर पालिका अध्यक्ष श्यामसुंदर केशरी द्वारा नगर के सिटी क्लब के प्रेक्षा गृह में विकसित भारत और उत्तर प्रदेश को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।जिसमें बड़ी संख्या में नगर के प्रबुद्धजन,व्यापारी वर्ग और सामाजिक संथाओं से जुड़े लोगों ने पहुंचकर अपने सुझाव और विचार को व्यक्त किया।लंबी वक्ताओं की सूची में एक-एक कर सभी ने अपने सुझाव दिए।जिसमें प्रमुख रूप से नगर के जाम से मुक्त करने के लिए नगर में मल्टी लेवल पार्किंग,ओझला पाथ वे,माधोसिंह क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज,स्वदेशी अपनाने,सड़कों के चौड़ीकरण,पालिका की जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र बनाकर इंडस्ट्रीज की स्थापना,शिक्षा में तकनीक को बढ़ावा देने के साथ कई और सुझाव वक्ताओं ने दिए।गोवर्धन त्रिपाठी ने देश में बने स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा देने,लल्लूराम मोदनवाल ने नगर के घंटाघर को और विकसित करने के साथ अन्य स्थानों को विकसित करने की बात कही,पत्रकार सलिल पांडेय ने पीतल,कालीन और पर्यटन बढ़ाने को लेकर सुझाव दिया।आशीष बुधिया ने सड़को की चौड़ीकरण, ओझला पर चेक डैम बनाकर पर्यटन बढ़ाने, माधोसिंह क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज बनवाने की बात कही,उन्होंने कहा कि माधोसिंह क्रॉसिंग होने के कारण मीरजापुर के लोगो चालीस मिनट तक इंतजार करना पड़ता है,ओवरब्रिज बनने से समय की बचत होगी।इसके साथ ही उन्होंने नपाध्यक्ष और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ के बीच वीडियो कॉन्फ्रेसिंग का भी जिक्र करते हुए कहा कि विंध्याचल के साथ नगर में भी मल्टी लेवल पार्किंग व्यवस्था की जाए,जिससे नगर को जाम से मुक्ति मिल सके।सिद्धनाथ सिंह ने औद्योगिक केंद्र स्थापना,गंगाघाट पर पाथवे,सड़को के चौड़ीकरण, टांडा फाल में वन क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ सड़कों गड्ढा मुक्त करने,इको टूरिज्म को बढ़ावा देने और शहर में पार्किंग व्यवस्था को लाने की बात कही।विनय सिंह ने कहा कि वाराणसी और प्रयागराय की तर्ज पर मीरजापुर में रिंग रोड बनाया जाए,इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश को शिक्षा के द्वारा विकसित किया जा सकता है,जिसके लिए हमें सभी शिक्षकों को ट्रेनिंग देनी होगी,तकनीकी शिक्षा पर जोर देना होगा,आज के समय में तकनीक बेहतर होने से देश के विकास को गति मिलती है।हमसे पीछे आजाद हुए देशों ने तकनीक के बल पर अपने देश का विकास किया है, इसलिए तकनीक को बढ़ावा देना होगा।डीजीसी आलोक राय ने निवेश बढ़ाने के लिए शांति और सुरक्षा देने की बात कही, उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले कंपनियों और निवेशकों को शान्ति और सुरक्षा मिलेगी तो प्रदेश में निवेश बढ़ेगा।इसी तरह राजेश मिश्रा, जगजीत सिंह डंग,मोहनलाल अग्रवाल,आशुकांत चुनाहे,बार कौंसिल के अध्यक्ष सुशील दुबे,सोनल सिंह,शत्रुधन केशरी ने भी अपने सुझाव और विचारों को व्यक्त किया।इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नपाध्यक्ष श्यामसुंदर केशरी ने कहा कि पीएम मोदी के विकसित भारत और मा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश को लेकर आयोजित इस संगोष्ठी कार्यक्रम में सभी ने अपने सुझाव और विचार व्यक्त किए है।उत्तर प्रदेश को विकसित बनाने के लिए सूबे के मुखिया ने हम सभी से सुझाव मांगा है।जिसके लिए हम सभी को अभी से मिलकर कार्य करना होगा।इस मौके पर उन्होंने वक्ताओं द्वारा दिए गए सुझावों पर बताया कि पर्यटन की दृष्टि से ओझला के पास चेक डैम बनाकर पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रस्ताव पहले से दिया जा चुका है। मा. मुख्यमंत्री जी ने खुद विंध्याचल में मल्टी लेवल पार्किंग बनवाने की बात कही थी,जिसे पहले से ही प्रस्ताव बनाकर भेजा जा चुका है।विंध्याचल के साथ नगर में भी स्थान देखकर मल्टी लेवल पार्किंग की व्यवस्था की जा रही है।माधोसिंह क्रॉसिंग के ऊपर ओवरब्रिज बनाने के लिए पहले से ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है।ऐसे कई सुझाव जो आज मिले है, उससे विकसित उत्तर प्रदेश का मार्ग खुलेगा, उन्होंने नगर के अन्य लोगों से भी ऐसे सुझाव मांगे जो विकसित भारत में उत्तर प्रदेश पहला विकसित राज्य बने उसके साथ ही मीरजापुर नगर पालिका भी प्रदेश की पहली विकसित नगर पालिका बने।कार्यक्रम का संचालन आशुकांत चुनाहे ने किया, अध्यक्षता खुद नपाध्यक्ष ने की।इस मौके पर सभासद सहित अन्य प्रबुद्धजन सहित गणमान्य लोग मौजूद रहे।
............... गढ़वा अपडेट एडिओ पंचायत धर्मेन्द्र दुबे ने बताया कि बस्ती में पेयजल की किल्लत नही है कुछ लोग अभी भी जंगल में जगह जगह वन विभाग की भूमि पर अवैध कब्जा कर रह रहे है जो एमपी और सोनभद्र के निवासी हैं उन्ही लोगों का यह आरोप है जो बिल्कुल गलत है । ................... मुख्यमंत्री ने इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन को दी मंजूरी, विशेषज्ञ सेल और सैटेलाइट ऑफिस स्थापित होंगे मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस स्थापित किए जाएंगे टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में गठित होंगे विशेषज्ञ सेल इन्वेस्ट यूपी को अधिक कार्यकुशल, विशेषज्ञता-आधारित और निवेशक-केंद्रित संस्था के रूप में विकसित करना है पुनर्गठन का उद्देश्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश: प्रत्येक प्रकोष्ठ का कार्यक्षेत्र स्पष्ट, निवेशक केंद्रित और परिणामोन्मुख बनाया जाए 11 महाप्रबंधक/सहायक महाप्रबंधक पदों पर कार्योत्तर स्वीकृति, दो संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीसीएस संवर्ग) की प्रतिनियुक्ति पर होगी तैनाती ‘एकल निवेश सुविधा एजेंसी’ के रूप में और व्यवस्थित होगी इन्वेस्ट यूपी 2024-25 में लगभग 4,000 नई फैक्ट्रियाँ स्थापित, कुल संख्या 27,000 तक पहुंची मुख्यमंत्री ने निवेश मित्र पोर्टल 3.0 के माध्यम से प्रक्रिया सरल और डिजिटल बनाने के निर्देश दिए ‘सेफ सिटी’ की तर्ज पर ‘सेफ इंडस्ट्री’ की परिकल्पना: सीसीटीवी, सुरक्षा और निवेशक विश्वास बढ़ाने पर जोर फोकस कंट्री डेस्क के माध्यम से होगा जापान, कोरिया, जर्मनी और खाड़ी देशों के निवेशकों से सक्रिय संवाद ‘चाइना+1’ रणनीति के तहत बहुराष्ट्रीय कंपनियों का उत्तर प्रदेश में निवेश, 219 कंपनियाँ सक्रिय चरण में मुख्यमंत्री का निर्देश, भूमि अधिग्रहण पर मिले उचित मुआवजा, सर्किल रेट असमानताओं का समापन करायें फॉर्च्यून 1000 सूची की 814 कंपनियों को अकाउंट मैनेजर आवंटित, अब तक 50 नए एमओयू हस्ताक्षरित,280 से अधिक कंपनियों से संवाद प्रगति पर लखनऊ, 13 अक्टूबर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को सम्पन्न इन्वेस्ट यूपी शासी निकाय की पहली बैठक में प्रदेश के औद्योगिक निवेश ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी। नए ढांचे के तहत टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेल गठित किए जाएंगे। साथ ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस स्थापित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से घरेलू और वैश्विक निवेशकों से सीधा संवाद स्थापित कर उत्तर प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन कार्यालयों के संचालन में पारदर्शिता, दक्षता और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुनर्गठन का उद्देश्य इन्वेस्ट यूपी को अधिक कार्यकुशल, विशेषज्ञता-आधारित और निवेशक-केंद्रित संस्था के रूप में विकसित करना है। बैठक में 11 महाप्रबंधक/सहायक महाप्रबंधक पदों पर कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। साथ ही, दो संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीसीएस संवर्ग) को प्रतिनियुक्ति पर तैनात करने तथा भूमि बैंक प्रकोष्ठ गठित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें दो पीसीएस अधिकारी (उपजिलाधिकारी/अपर जिलाधिकारी स्तर) तैनात होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नया ढांचा इन्वेस्ट यूपी को एक ‘एकल निवेश सुविधा एजेंसी’ के रूप में सशक्त बनाएगा, जो न केवल निवेश आकर्षित करेगी बल्कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन तक उनकी सक्रिय निगरानी भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने निर्देश दिया कि इस ढांचे को त्वरित प्रभाव से लागू किया जाए और प्रत्येक प्रकोष्ठ का कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित हो, ताकि निवेश संवर्धन की दिशा में समन्वित और परिणामोन्मुख व्यवस्था विकसित हो सके। बैठक में बताया गया कि बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में लगभग 4,000 नई फैक्ट्रियाँ स्थापित हुईं, जिससे कुल संख्या लगभग 27,000 तक पहुँच गई है। वर्ष 2022-23 तक प्रतिवर्ष औसतन 500 नई इकाइयाँ स्थापित हो रही थीं, जिनमें अब कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ मंत्र के सफल क्रियान्वयन से राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में आए सकारात्मक परिवर्तन का प्रमाण है। बैठक में निवेश प्रोत्साहन और सुविधा व्यवस्था की समीक्षा की गई। बताया गया कि फॉर्च्यून 1000 सूची की 814 कंपनियों को अकाउंट मैनेजर आवंटित किए गए हैं। अब तक 50 नए एमओयू हस्ताक्षरित हो चुके हैं तथा 280 से अधिक कंपनियों से संवाद प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशक इकाइयों को भूमि, सब्सिडी आदि के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए भी संवाद बढ़ाया जाए। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश अब नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि ‘ग्राउंड लेवल डिलीवरी’ का उदाहरण बन चुका है। उन्होंने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल 3.0 के माध्यम से आवेदन, स्वीकृति और प्रोत्साहन की प्रक्रिया को और सरल किया जा रहा है, जिससे 30% तक प्रक्रिया समय और 50% तक दस्तावेजी औपचारिकताओं में कमी आएगी। पोर्टल में सिंगल साइन-ऑन, डायनेमिक एप्लीकेशन सिस्टम, एआई आधारित चैटबॉट, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएँ शामिल की जा रही हैं, जो निवेशकों के अनुभव को और अधिक सुगम बनाएंगी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिया कि वे मासिक लक्ष्य निर्धारित करें और स्वीकृत परियोजनाओं की ‘लेटर्स ऑफ कम्फर्ट’ जारी करने की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी करें। उन्होंने कहा कि नीति के अनुरूप देय इंसेंटिव बिना किसी बाधा के समय पर वितरित किए जाएँ तथा इंडस्ट्रियल बिल्डिंग बायलॉज को और अधिक व्यावहारिक एवं निवेशक हितैषी बनाया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि फोकस कंट्री डेस्क के माध्यम से जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, रूस, ताइवान, सिंगापुर और खाड़ी देशों के निवेशकों से सक्रिय संवाद स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वैश्विक मंचों पर उत्तर प्रदेश की औद्योगिक छवि को और सुदृढ़ किया जाए तथा प्रत्येक कंट्री डेस्क ठोस निवेश परिणामों पर कार्य करे। मुख्यमंत्री ने यूपीडा, यूपीसीडा, बीडा और अन्य औद्योगिक प्राधिकरणों को ऑटोमोबाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर जैसे क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि ‘चाइना+1’ रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पसंदीदा निवेश केंद्र बन रहा है। वर्तमान में 219 कंपनियाँ निवेश प्रक्रिया के सक्रिय चरण में हैं, जिनमें कई जापान, कोरिया और ताइवान की अग्रणी कंपनियाँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन प्रस्तावों की सतत मॉनिटरिंग की जाए और सभी विभाग इन अवसरों को मूर्त रूप देने के लिए समन्वित ढंग से कार्य करें। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के पास 25,000 एकड़ से अधिक ग्रीनफील्ड भूमि तथा 6,300 एकड़ से अधिक रेडी-टू-मूव भूमि निवेश हेतु उपलब्ध है। 33,000 से अधिक औद्योगिक भूखंडों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों व व्यापारियों से सीधा संवाद किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सर्किल रेट की असमानताओं को समाप्त करने और अप्रयुक्त औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित समय सीमा के बाद निरस्त कर नए निवेशकों को आवंटित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ‘सेफ सिटी’ की तर्ज पर ‘सेफ इंडस्ट्री’ की परिकल्पना रखी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हों, ताकि निवेशक और उद्यमी निश्चिंत होकर कार्य कर सकें। उन्होंने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अधीन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को और सुदृढ़ करने पर बल दिया। साथ ही निर्देश दिया कि मंडलायुक्त और जिलाधिकारी नियमित रूप से निवेशकों/उद्यमियों से संवाद करें, उनकी अपेक्षाओं और समस्याओं का यथोचित समाधान सुनिश्चित करें तथा आवश्यकतानुसार शासन को अवगत कराएं। बैठक में औद्योगिक विकास, निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी और इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी उपस्थित रहे।
..................... मुख्यमंत्री ने इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन को दी मंजूरी, विशेषज्ञ सेल और सैटेलाइट ऑफिस स्थापित होंगे मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस स्थापित किए जाएंगे टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में गठित होंगे विशेषज्ञ सेल इन्वेस्ट यूपी को अधिक कार्यकुशल, विशेषज्ञता-आधारित और निवेशक-केंद्रित संस्था के रूप में विकसित करना है पुनर्गठन का उद्देश्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश: प्रत्येक प्रकोष्ठ का कार्यक्षेत्र स्पष्ट, निवेशक केंद्रित और परिणामोन्मुख बनाया जाए 11 महाप्रबंधक/सहायक महाप्रबंधक पदों पर कार्योत्तर स्वीकृति, दो संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीसीएस संवर्ग) की प्रतिनियुक्ति पर होगी तैनाती ‘एकल निवेश सुविधा एजेंसी’ के रूप में और व्यवस्थित होगी इन्वेस्ट यूपी 2024-25 में लगभग 4,000 नई फैक्ट्रियाँ स्थापित, कुल संख्या 27,000 तक पहुंची मुख्यमंत्री ने निवेश मित्र पोर्टल 3.0 के माध्यम से प्रक्रिया सरल और डिजिटल बनाने के निर्देश दिए ‘सेफ सिटी’ की तर्ज पर ‘सेफ इंडस्ट्री’ की परिकल्पना: सीसीटीवी, सुरक्षा और निवेशक विश्वास बढ़ाने पर जोर फोकस कंट्री डेस्क के माध्यम से होगा जापान, कोरिया, जर्मनी और खाड़ी देशों के निवेशकों से सक्रिय संवाद ‘चाइना+1’ रणनीति के तहत बहुराष्ट्रीय कंपनियों का उत्तर प्रदेश में निवेश, 219 कंपनियाँ सक्रिय चरण में मुख्यमंत्री का निर्देश, भूमि अधिग्रहण पर मिले उचित मुआवजा, सर्किल रेट असमानताओं का समापन करायें फॉर्च्यून 1000 सूची की 814 कंपनियों को अकाउंट मैनेजर आवंटित, अब तक 50 नए एमओयू हस्ताक्षरित,280 से अधिक कंपनियों से संवाद प्रगति पर लखनऊ, 13 अक्टूबर: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को सम्पन्न इन्वेस्ट यूपी शासी निकाय की पहली बैठक में प्रदेश के औद्योगिक निवेश ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में इन्वेस्ट यूपी के पुनर्गठन प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ने स्वीकृति दी। नए ढांचे के तहत टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल एवं इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सर्विस सेक्टर जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ सेल गठित किए जाएंगे। साथ ही मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई और नई दिल्ली में सैटेलाइट इन्वेस्टमेंट प्रमोशन ऑफिस स्थापित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से घरेलू और वैश्विक निवेशकों से सीधा संवाद स्थापित कर उत्तर प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन कार्यालयों के संचालन में पारदर्शिता, दक्षता और परिणामोन्मुखी दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुनर्गठन का उद्देश्य इन्वेस्ट यूपी को अधिक कार्यकुशल, विशेषज्ञता-आधारित और निवेशक-केंद्रित संस्था के रूप में विकसित करना है। बैठक में 11 महाप्रबंधक/सहायक महाप्रबंधक पदों पर कार्योत्तर स्वीकृति दी गई। साथ ही, दो संयुक्त मुख्य कार्यपालक अधिकारी (पीसीएस संवर्ग) को प्रतिनियुक्ति पर तैनात करने तथा भूमि बैंक प्रकोष्ठ गठित करने का निर्णय लिया गया, जिसमें दो पीसीएस अधिकारी (उपजिलाधिकारी/अपर जिलाधिकारी स्तर) तैनात होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नया ढांचा इन्वेस्ट यूपी को एक ‘एकल निवेश सुविधा एजेंसी’ के रूप में सशक्त बनाएगा, जो न केवल निवेश आकर्षित करेगी बल्कि परियोजनाओं के क्रियान्वयन तक उनकी सक्रिय निगरानी भी सुनिश्चित करेगी। उन्होंने निर्देश दिया कि इस ढांचे को त्वरित प्रभाव से लागू किया जाए और प्रत्येक प्रकोष्ठ का कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से परिभाषित हो, ताकि निवेश संवर्धन की दिशा में समन्वित और परिणामोन्मुख व्यवस्था विकसित हो सके। बैठक में बताया गया कि बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2024-25 में लगभग 4,000 नई फैक्ट्रियाँ स्थापित हुईं, जिससे कुल संख्या लगभग 27,000 तक पहुँच गई है। वर्ष 2022-23 तक प्रतिवर्ष औसतन 500 नई इकाइयाँ स्थापित हो रही थीं, जिनमें अब कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म’ मंत्र के सफल क्रियान्वयन से राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र में आए सकारात्मक परिवर्तन का प्रमाण है। बैठक में निवेश प्रोत्साहन और सुविधा व्यवस्था की समीक्षा की गई। बताया गया कि फॉर्च्यून 1000 सूची की 814 कंपनियों को अकाउंट मैनेजर आवंटित किए गए हैं। अब तक 50 नए एमओयू हस्ताक्षरित हो चुके हैं तथा 280 से अधिक कंपनियों से संवाद प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने कहा कि निवेशक इकाइयों को भूमि, सब्सिडी आदि के साथ-साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए भी संवाद बढ़ाया जाए। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश अब नीतिगत प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि ‘ग्राउंड लेवल डिलीवरी’ का उदाहरण बन चुका है। उन्होंने कहा कि निवेश मित्र पोर्टल 3.0 के माध्यम से आवेदन, स्वीकृति और प्रोत्साहन की प्रक्रिया को और सरल किया जा रहा है, जिससे 30% तक प्रक्रिया समय और 50% तक दस्तावेजी औपचारिकताओं में कमी आएगी। पोर्टल में सिंगल साइन-ऑन, डायनेमिक एप्लीकेशन सिस्टम, एआई आधारित चैटबॉट, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी सुविधाएँ शामिल की जा रही हैं, जो निवेशकों के अनुभव को और अधिक सुगम बनाएंगी। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों को निर्देश दिया कि वे मासिक लक्ष्य निर्धारित करें और स्वीकृत परियोजनाओं की ‘लेटर्स ऑफ कम्फर्ट’ जारी करने की प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी करें। उन्होंने कहा कि नीति के अनुरूप देय इंसेंटिव बिना किसी बाधा के समय पर वितरित किए जाएँ तथा इंडस्ट्रियल बिल्डिंग बायलॉज को और अधिक व्यावहारिक एवं निवेशक हितैषी बनाया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि फोकस कंट्री डेस्क के माध्यम से जापान, दक्षिण कोरिया, जर्मनी, फ्रांस, रूस, ताइवान, सिंगापुर और खाड़ी देशों के निवेशकों से सक्रिय संवाद स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वैश्विक मंचों पर उत्तर प्रदेश की औद्योगिक छवि को और सुदृढ़ किया जाए तथा प्रत्येक कंट्री डेस्क ठोस निवेश परिणामों पर कार्य करे। मुख्यमंत्री ने यूपीडा, यूपीसीडा, बीडा और अन्य औद्योगिक प्राधिकरणों को ऑटोमोबाइल, फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और लेदर जैसे क्षेत्रों में क्लस्टर आधारित औद्योगिक विकास पर विशेष ध्यान देने को कहा। बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि ‘चाइना+1’ रणनीति के तहत उत्तर प्रदेश अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों का पसंदीदा निवेश केंद्र बन रहा है। वर्तमान में 219 कंपनियाँ निवेश प्रक्रिया के सक्रिय चरण में हैं, जिनमें कई जापान, कोरिया और ताइवान की अग्रणी कंपनियाँ शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन प्रस्तावों की सतत मॉनिटरिंग की जाए और सभी विभाग इन अवसरों को मूर्त रूप देने के लिए समन्वित ढंग से कार्य करें। बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के पास 25,000 एकड़ से अधिक ग्रीनफील्ड भूमि तथा 6,300 एकड़ से अधिक रेडी-टू-मूव भूमि निवेश हेतु उपलब्ध है। 33,000 से अधिक औद्योगिक भूखंडों का सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों व व्यापारियों से सीधा संवाद किया जाए और उन्हें उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सर्किल रेट की असमानताओं को समाप्त करने और अप्रयुक्त औद्योगिक भूखंडों को निर्धारित समय सीमा के बाद निरस्त कर नए निवेशकों को आवंटित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने ‘सेफ सिटी’ की तर्ज पर ‘सेफ इंडस्ट्री’ की परिकल्पना रखी। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए, सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम हों, ताकि निवेशक और उद्यमी निश्चिंत होकर कार्य कर सकें। उन्होंने औद्योगिक विकास प्राधिकरणों के अधीन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को और सुदृढ़ करने पर बल दिया। साथ ही निर्देश दिया कि मंडलायुक्त और जिलाधिकारी नियमित रूप से निवेशकों/उद्यमियों से संवाद करें, उनकी अपेक्षाओं और समस्याओं का यथोचित समाधान सुनिश्चित करें तथा आवश्यकतानुसार शासन को अवगत कराएं। बैठक में औद्योगिक विकास, निवेश एवं निर्यात प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’, नगर विकास मंत्री अरविंद शर्मा, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, औद्योगिक विकास राज्य मंत्री जसवंत सिंह सैनी, शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारी और इन्वेस्ट यूपी के अधिकारी उपस्थित रहे
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