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केंद्र सरकार ने मणिपुर में लगाया राष्ट्रपति शासन,

केंद्र सरकार ने मणिपुर में लगाया राष्ट्रपति शासन,
बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद उठाया कदम
नई दिल्ली: मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लग गया है. इस संबंध में गृह मंत्रालय ने अधिसूचना जारी की है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब राज्य विधानसभा का सत्र बुलाने की समयसीमा 12 फरवरी को समाप्त हो गई थी, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता और बढ़ गई.
राष्ट्रपति शासन लागू होते ही मणिपुर की सारी प्रशासनिक और सरकारी शक्तियां केंद्र सरकार के हाथों में आ गई हैं. इसके साथ ही राज्य में गवर्नर के माध्यम से केंद्र सरकार शासन करेगी और कोई मुख्यमंत्री या मंत्रिमंडल नहीं होगा.

बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद के से दिया था इस्तीफा

बता दें कि 9 फरवरी को एन बीरेन सिंह ने मुख्यमंत्री पद के से इस्तीफा दे दिया था. बीरेन सिंह ने अपने इस्तीफे में लिखा, "अब तक मणिपुर के लोगों की सेवा करना सम्मान की बात रही है. मैं केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं. उन्होंने समय पर कार्रवाई की, मदद की और विकास के काम किए. साथ ही बीरेन सिंह ने लिखा कि हर मणिपुरी के हितों की रक्षा के लिए कई परियोजनाएं भी चलाईं. मेरा केंद्र सरकार से अनुरोध है कि वह इसी तरह काम करती रहे."
जातीय हिंसा से जूझ रहा था मणिपुर
गौरतलब है कि मणिपुर में लंबे समय से जातीय हिंसा से जूझ रहा था. राज्य में बार-बार हिंसा हो रही थी और अशांति फैल रही थी. इसके चलते राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई थी. बीरेन सिंह लंबे समय से मणिपुर की बिगड़ती स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उनकी सफलता नहीं मिल रही थी.
उल्लेखनीय है उनका इस्तीफा सुप्रीम कोर्ट द्वारा लीक हुए ऑडियो टेप की रिपोर्ट के लिए केंद्रीय फोरेंसिक लैब को निर्देश दिए जाने के बाद आया, जिसमें कथित तौर पर सिंह को यह कहते हुए सुना गया है कि राज्य में जातीय हिंसा उनके आग्रह पर भड़काई गई थी. इसको लेकर विपक्षी दलों ने भाजपा पर अपनी सरकार को गिरने से बचाने और सुप्रीम कोर्ट से एक्शन के डर से सिंह को देर से पद से हटाने का आरोप लगाया.

................. 86 देशों की जेलों में 10 हजार से ज्यादा भारतीय, नेपाल में 1300 कैदी, 54 को मौत की सजा नई दिल्ली: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद साकेत गोखले के एक सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में लिखित जवाब में कहा कि वर्तमान में दुनियाभर के देशों की जेलों में कुल 10,152 भारतीय नागरिक बंद हैं. उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा भारतीय कैदी सऊदी अरब, यूएई और नेपाल में हैं. संसद में गुरुवार को सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वर्तमान में दुनिया भर के 86 देशों की जेलों में कुल 10,152 भारतीय नागरिक बंद हैं. इनमें से सबसे अधिक संख्या सऊदी अरब में है, जहां 2633 भारतीय कैदी जेल में बंद है. इसके संयुक्त अरब अमीरात 2518 और नेपाल 1317 भारतीय जेल में हैं. सिंह ने बताया कि कतर में 611, कुवैत में 387, मलेशिया में 338, यूके में 288, पाकिस्तान में 266, बहरीन में 181, चीन में 173, अमेरिका में 169, इटली में 168 और ओमान में 148 भारतीय नागरिक कैदी हैं. कितने भारतीय कर रहे विदेशी में मुकदमों का सामना? विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा में कुल संख्या में 2684 भारतीय ऐसे हैं, जो विदेशी में मुकदमों का सामना कर रहे हैं. मंत्री ने बताया कि सऊदी अरब में भी सबसे अधिक 1226 विचाराधीन भारतीय कैदी हैं. विचाराधीन कैदियों वाले अन्य देशों में यूएई शामिल हैं, जहां 294 विचारअधीन भारतीय कैदी है, जबकि बहरीन में 144, कतर में 123 और मलेशिया में 121 भारतीय हैं. 54 भारतीयों को मौत की सजा हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सिंह ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद हारिस बीरन के एक अन्य सवाल के जवाब में कहा कि 54 भारतीय नागरिकों को विदेशी अदालतों ने मृत्युदंड दिया है. मृत्युदंड की सजा पाने वाले सबसे अधिक भारतीय यूएई में हैं, जहां 29 भारतीय नागरिकों को मौत की सजा सुनाई गई है. इसी तरह सऊदी अरब ने 12 भारतीयों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है. उन्होंने कहा कि भारतीय मिशन उन नागरिकों को हर संभव सहायता प्रदान करते हैं, जिन्हें विदेशी अदालतों ने मृत्युदंड सहित सजा सुनाई है. इस सहायता में जेलों का दौरा करके काउंसलर एक्सेस, अदालतों, जेलों, सरकारी अभियोजकों और अन्य एजेंसियों के साथ उनके मामलों का पालन करना शामिल है. सिंह ने कहा, "जेल में बंद भारतीय नागरिकों को अपील, दया याचिका आदि दायर करने सहित विभिन्न कानूनी उपायों की खोज में भी सहायता की जाती है." 307 भारतीय मछुआरे हिरासत में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के सांसद संदोष कुमार पी के एक सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि वर्तमान में कुल 307 भारतीय मछुआरे विदेशी में हिरासत में हैं, जिनमें पाकिस्तान में 217, श्रीलंका में 58, सऊदी अरब में 28 और बहरीन में चार शामिल हैं. उन्होंने बताया कि 2024 के दौरान श्रीलंका ने 479 भारतीय मछुआरों को रिहा किया, जबकि बांग्लादेश ने 95, बहरीन ने 47, कतर ने 29 और सऊदी अरब ने 27 मछुआरों को रिहा किया. सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को उच्च प्राथमिकता देती है और राजनयिक चैनलों, आधिकारिक बातचीत और स्थापित द्विपक्षीय तंत्रों के माध्यम से विदेशी सरकारों के साथ उनकी नावों के साथ उनकी शीघ्र रिहाई और प्रत्यावर्तन जैसे मुद्दों को उठाती है. सिंह ने कहा, "भारतीय मछुआरों की जल्द से जल्द रिहाई और प्रत्यावर्तन का मामला लगातार सभी स्तरों पर संबंधित देशों के साथ उठाया जाता है और यह बताया जाता है कि इस मुद्दे पर पूरी तरह से मानवीय और आजीविका के आधार पर विचार किया जा सकता है." भारतीय अधिकारी नियमित रूप से भारतीय मछुआरों की स्थिति का पता लगाने और कानूनी सहायता सहित सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए जेलों और हिरासत केंद्रों का दौरा करते हैं. वे रिहा किए गए मछुआरों के प्रत्यावर्तन को सुविधाजनक बनाने के लिए यात्रा दस्तावेज भी प्रदान करते हैं.

................... मेरठ का करोड़पति दरोगा..... छापे में मिली 16 करोड़ की दौलत आलीशान बंगले और स्कूलों का मालिक निकला यूपी में तीन जगहों पर तोबड़तोड़ आईटी की छापेमारी देखने को मिली. जिसमें कानपुर, बरेली समेत मेरठ भी शामिल है. अगर बात मेंरठ की करें तो रिटायर्ड दरोगा के यहां की गई थी. इस दौरान पता चला कि दरोगा ने अपनी आय से 147% अधिक संपत्ति अर्जित किया है. ********** यूपी के मेरठ में रिटायर्ड दरोगा के यहां विजिलेंस टीम ने छापेमारी की. इस दौरान 22 अफसरों की टीम मौजूद रही. सात घंटों के जाच के बाद पता चला कि दरोगा ने अपनी आय से 147% अधिक संपत्ति अर्जित की है. यह मामला पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर सवाल खड़े करता है. विजिलेंस टीम अब आगे की जांच में जुटी है. छापेमारी में 16 करोड़ की संपत्ति का खुलासा..... विजिलेंस टीम ने यूपी पुलिस के रिटायर्ड दरोगा महेंद्र सिंह सैनी के दो मकानों और एक स्कूल में छापेमारी की. इस दौरान 10 बैंक खातों के दस्तावेज, 30 भूमि बैनामे, और स्कूल के दस्तावेज बरामद हुए. जांच में यह भी सामने आया कि दरोगा की कुल संपत्ति 16 करोड़ रुपए से अधिक है. टीम ने इन सभी दस्तावेजों को जब्त कर लिया है. दरोगा और उसके परिवार से जुड़ी संपत्ति की जांच...... विजिलेंस ASP इंदू सिद्धार्थ के नेतृत्व में यह कार्रवाई की गई. टीम ने मेडिकल थाना क्षेत्र स्थित कीर्ति पैलेस कॉलोनी के मकान नंबर A-63 और A-03 पर छापा मारा. दोनों मकान दो मंजिला हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब तीन करोड़ रुपए है. इसके अलावा, विजिलेंस टीम ने जाग्रति विहार स्थित न्यू दिल्ली पब्लिक स्कूल में भी जांच की. इस स्कूल की सोसाइटी की अध्यक्ष महेंद्र सिंह सैनी की पत्नी शकुंतला देवी हैं, जबकि उनके बेटे अनुराग सैनी स्कूल के प्रबंधक और महामंत्री हैं. जांच में पाया गया कि स्कूल की संपत्ति की कीमत करीब 11.5 करोड़ रुपए है. आय से अधिक संपत्ति का मामला..... महेंद्र सिंह सैनी 2019 में पुलिस विभाग से सेवानिवृत्त हुए थे. उनके खिलाफ 2022 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था. जांच में पता चला कि यूपी पुलिस में सेवा के दौरान उनकी कुल वैध आय 58,04,666 रुपए थी, लेकिन उन्होंने 1,43,84,668 रुपए खर्च किए. यानी उन्होंने अपनी कमाई से 85,79,802 रुपए अधिक खर्च किए, जो कि उनकी आय का 147% अधिक है. बरामद सामान और अन्य जानकारियां...... दरोगा के घर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, आभूषण और अन्य कीमती सामान बरामद हुए. उनके पास एक कार और तीन स्कूटी मिलीं. टाटा सफारी और ब्रेजा कार की जानकारी भी विजिलेंस टीम ने दर्ज की. 30 भूमि बैनामों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए. नोटिस का नहीं दे रहे थे जवाब...... 2024 में दरोगा के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मुकदमा दर्ज हुआ था. विजिलेंस टीम उन्हें कई बार पूछताछ के लिए बुला चुकी थी, लेकिन वे बार-बार नोटिस को नजरअंदाज कर रहे थे. फोन कॉल का भी जवाब नहीं दे रहे थे. आगे की कार्रवाई..... विजिलेंस की मेरठ सेक्टर इंस्पेक्टर मंजू गुप्ता की जांच के बाद दरोगा को दोषी मानते हुए उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13 (1) और 13 (2) के तहत मामला दर्ज किया गया है. विजिलेंस टीम ने महेंद्र सिंह सैनी को अपनी संपत्ति के स्रोतों की जानकारी देने का आदेश दिया है. जी न्यूज

................. PCS गणेश प्रसाद सिंह 2011 बर्ख़ास्त PCS आशीष कुमार सस्पेंड PCS मदन कुमार सस्पेंड बरेली सितारगंज हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में अनियमिता के मामले पर दो PCS अफसर को नियुक्ति विभाग में सस्पेंड किया है कुशीनगर में वर्ष 2014 से 2018 ग्राम समाज की जमीन के पत्ते के नियमों में उलझन काम करने के मामले में लगे भ्रष्टाचार के आरोप में गणेश प्रसाद को जौनपुर को बर्खास्त किया गया है जौनपुर CRO पर भी वित्तीय अनियमितता के इल्जाम लगे थे, यह कुशीनगर में SDM थे

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